
रेहरा बाजार (बलरामपुर) के किशनपुर ग्रांट स्थित राम जानकी मंदिर परिसर में आल्हा गायन हुआ। इस कार्यक्रम में आल्हा गायन की पारंपरिक शैली ने लोगों का ध्यान खींचा। वीर रस से भरी आल्हा की गूंज से मंदिर परिसर का माहौल देर तक भक्ति और उत्साह से भरा रहा। कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली आवाज और पारंपरिक अंदाज में आल्हा की वीरगाथाएं गाईं। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, श्रोता भी आल्हा की प्रस्तुति में मग्न हो गए। इस पारंपरिक लोकगायन को सुनने के लिए आसपास के लोग भी मंदिर परिसर पहुंचे थे। आयोजकों ने बताया कि आल्हा जैसी लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं। आधुनिक समय में इन लोक विधाओं को बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। ऐसे आयोजन ग्रामीण इलाकों में लोक संस्कृति को जीवंत रखने के साथ ही लोगों को अपनी परंपराओं से जुड़ने का मौका देते हैं। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालु और ग्रामीण मौजूद थे। आल्हा गायन के बीच लोगों ने कलाकारों का हौसला बढ़ाया और आयोजन का आनंद लिया। किशनपुर ग्रांट में हुआ यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति को बचाने की मिसाल बना।
































