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केजीबीवी पहुंचकर छात्राओं से सीधे संवाद:पढ़ाई और सुविधाओं का लिया फीडबैक; समस्याएं सुनकर मदद का भरोसा

श्रावस्ती में विधान परिषद सदस्य साकेत मिश्रा ने बुधवार को गिलौला स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) का दौरा किया। उन्होंने विद्यालय की छात्राओं से सीधे बातचीत कर उनकी पढ़ाई, स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं और जरूरतों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान छात्राओं ने भी अपनी समस्याएं और अपेक्षाएं उनके सामने रखीं। जनप्रतिनिधि से सीधे संवाद का मौका मिलने पर छात्राएं उत्साहित नजर आईं। छात्राओं से पढ़ाई को लेकर की बातचीत विद्यालय पहुंचने के बाद साकेत मिश्रा ने छात्राओं से उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। उन्होंने स्कूल में पढ़ाई के माहौल, कक्षाओं और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी पूछा। छात्राओं ने अपनी दिनचर्या और पढ़ाई से जुड़ी बातों को उनके साथ साझा किया। छात्राओं ने खुलकर बताईं अपनी समस्याएं संवाद के दौरान छात्राओं ने विद्यालय से जुड़ी अपनी समस्याओं और जरूरतों को सामने रखा। छात्राओं ने जनप्रतिनिधि के सामने अपनी अपेक्षाएं भी रखीं। सीधे संवाद के कारण उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिला। बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल पर जोर साकेत मिश्रा ने कहा कि बालिकाओं को बेहतर शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से बेटियों को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाया जा सकता है। इसके लिए विद्यालयों में जरूरी सुविधाओं का होना भी महत्वपूर्ण है। डीएम के प्रयासों की सराहना की एमएलसी ने बालिकाओं की शिक्षा सुविधाओं में सुधार के लिए श्रावस्ती जिलाधिकारी की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले में बेटियों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए चल रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने में वह सहयोग करेंगे। जिले की बेटियों को बेहतर सुविधाओं का भरोसा साकेत मिश्रा ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि श्रावस्ती की बेटियों को अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाएं मिलें। उन्होंने विद्यालय की छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी जरूरतों और समस्याओं को संबंधित स्तर पर उठाया जाएगा। दौरे से छात्राओं में दिखा उत्साह जनप्रतिनिधि के विद्यालय पहुंचने और छात्राओं से सीधे संवाद करने से छात्राएं उत्साहित दिखीं। उन्होंने अपनी बात खुलकर रखी। विद्यालय भ्रमण के दौरान शिक्षा व्यवस्था और छात्राओं की जरूरतों पर बातचीत हुई। इसे बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में संवाद की एक पहल के तौर पर देखा गया।