श्रावस्ती की बौद्ध तपोस्थली कटरा श्रावस्ती इन दिनों विदेशी बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। तीर्थ क्षेत्र की ओर से गुरुवार सुबह 8 बजे दी गई जानकारी के मुताबिक, बुधवार को वियतनाम से 30 सदस्यीय बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालुओं का दल श्रावस्ती पहुंचा। दल ने भिक्षु देवानंद की अध्यक्षता में बोधिवृक्ष के नीचे रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना की और भगवान बुद्ध को याद किया। पूजा के बाद वियतनामी दल ने जेतवन परिसर का भ्रमण किया। यहां अनुयायियों ने प्राचीन बौद्ध स्थलों को देखा और भगवान बुद्ध के श्रावस्ती प्रवास से जुड़े इतिहास की जानकारी ली। विदेशी श्रद्धालुओं ने जेतवन की आध्यात्मिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व को करीब से महसूस किया। बोधिवृक्ष के नीचे विधि-विधान से की पूजा वियतनाम से आए बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने बोधिवृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना की। भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में भगवान बुद्ध को याद किया गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा कर आध्यात्मिक शांति की कामना की। पूजा के दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध की शक्ति आध्यात्मिक ज्ञान, गहन ध्यान, आत्म-अनुशासन, प्रज्ञा और करुणा से आती है। उन्होंने अपने ज्ञान और विवेक के जरिए लोगों को अज्ञानता से बाहर निकलकर सत्य और मुक्ति का रास्ता अपनाने का संदेश दिया। जेतवन में बुद्ध के इतिहास से रूबरू हुए श्रद्धालु पूजा के बाद दल ने जेतवन परिसर का भ्रमण किया। विदेशी श्रद्धालुओं ने यहां मौजूद प्राचीन बौद्ध स्थलों को देखा। उन्होंने भगवान बुद्ध के श्रावस्ती प्रवास और यहां से जुड़ी बौद्ध परंपराओं की जानकारी ली। अनुयायियों ने जेतवन की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से देखा। बौद्ध धर्म की शिक्षाओं में करुणा, प्रेम और आत्म-अनुशासन को दिए गए महत्व के बारे में भी चर्चा की गई।
बुद्ध ने श्रावस्ती में बिताया था लंबा समय श्रावस्ती बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपने जीवन का सबसे लंबा समय श्रावस्ती में बिताया था। उन्होंने यहां करीब 24 से 25 वर्षावास किए थे। इसी वजह से बौद्ध धर्म से जुड़े देशों के श्रद्धालुओं में श्रावस्ती को लेकर विशेष आस्था है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां बोधिवृक्ष, जेतवन समेत अन्य बौद्ध स्थलों के दर्शन करते हैं और भगवान बुद्ध से जुड़े इतिहास को समझते हैं। वियतनाम के साथ दूसरे देशों से भी आ रहे दल इन दिनों वियतनाम के अलावा थाईलैंड, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों से भी बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं के दल श्रावस्ती पहुंच रहे हैं। विदेशी अनुयायियों के आने से तीर्थ क्षेत्र में चहल-पहल बढ़ी है। तीर्थ क्षेत्र की ओर से विदेशी श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी बाद में दी जाती है। बुधवार को वियतनाम का दल पहुंचा था, जिसकी जानकारी गुरुवार सुबह तीर्थ क्षेत्र की ओर से साझा की गई। इससे श्रावस्ती में लगातार बढ़ रही विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं की आवाजाही सामने आती है।





























