रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की दर्दनाक मौत के मामले में परिजनों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। न्याय और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग को लेकर परिजनों का धरना प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने धरना स्थल पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
‘जब तक एफआईआर नहीं, तब तक धरना खत्म नहीं’ – पिता की दोटूक
मृतका के पिता रामशरण मिश्रा ने शासन-प्रशासन के सामने अपनी मांगें स्पष्ट करते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराई गई कल्पना की इलाज के दौरान डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण तबीयत बिगड़ी, जिससे मां और नवजात दोनों की जान चली गई। पिता रामशरण मिश्रा ने कहा कि जब तक जिम्मेदार डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं होती, तब तक वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे।
प्रशासन की कार्रवाई: अधीक्षक हटाए गए, दो डॉक्टर और दो नर्सें निलंबित
मामले में परिजनों की शिकायत और बढ़ते जनआक्रोश के बाद जिला प्रशासन एवं अस्पताल प्रबंधन द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए सात सदस्यों की एक विशेष समिति गठित की गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, दो डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और दो नर्सिंग स्टाफ कर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई की गई है।
विभागीय कार्रवाई से असंतुष्ट परिवार, कानूनी कार्रवाई पर अड़ा
अस्पताल प्रबंधन की ओर से की गई इस विभागीय कार्रवाई से पीड़ित परिवार बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि निलंबन या पद से हटाया जाना एक अस्थाई प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिससे उनकी बेटी और नाती को न्याय नहीं मिलेगा। वे दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की मांग पर अड़े हुए हैं ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार के साथ ऐसी लापरवाही न हो।































