
पयागपुर के परसिया आलम गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में जन्माष्टमी का पर्व खुशी और धार्मिक जोश के साथ मनाया गया। इस दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के अलग-अलग रूप धारण कर धर्म और संस्कारों का संदेश दिया। स्कूल परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और बच्चों की कला का अच्छा मेल देखने को मिला। बच्चों की सुंदर झांकियों और प्रस्तुतियों ने मौजूद सभी लोगों का मन जीत लिया। जन्माष्टमी के मौके पर स्कूल में एक खास सांस्कृतिक कार्यक्रम रखा गया था। इसमें करीब आठ बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के अलग-अलग स्वरूपों को दिखाया। किसी बच्चे ने श्रीकृष्ण का बाल रूप धारण किया, तो किसी ने उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं को अपने अभिनय से प्रस्तुत किया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों, उनके बताए रास्ते पर चलने और सच्चाई, धर्म व अच्छे व्यवहार को अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए। छोटे विद्यार्थियों ने गीत, भजन और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अपनी कला का प्रदर्शन किया। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियां देखकर स्कूल में मौजूद शिक्षक, अभिभावक और ग्रामीण बहुत खुश दिखे। कार्यक्रम के दौरान तालियों से पूरा स्कूल परिसर गूंज उठा। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक नवल कुमार पाठक ने कहा कि भारतीय त्योहार बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जोड़ने का एक जरूरी तरीका हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन व उनके आदर्शों से प्रेरणा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार और संस्कृति की जानकारी देना भी जरूरी है। जन्माष्टमी कार्यक्रम में छात्र विवेक कुमार मिश्रा, रामदेव, अनुज कुमार, अभिषेक कुमार, सुभाष, आकाश, वैष्णवी दीक्षित और देवास दीक्षित समेत स्कूल के कई दूसरे विद्यार्थी मौजूद रहे। मौजूद लोगों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की खूब तारीफ की। कार्यक्रम खत्म होने पर सभी ने भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और समाज में प्रेम, सद्भाव व भाईचारे का संदेश फैलाने का संकल्प लिया।
































