
नेपाल में आई जल त्रासदी के बाद भारतीय सीमा से सटे महराजगंज में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। बचाव और राहत कार्यों से जुड़ी टीमें सक्रिय हैं, जबकि नियंत्रण कक्ष भी पूरी तरह से काम कर रहा है। अधिकारियों द्वारा निगरानी बढ़ा दी गई है और तटबंधों की सुरक्षा के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। जिले की सभी प्रमुख नदियां फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से तीन मीटर नीचे है, वहीं महाव नाला भी खतरे के निशान से एक फीट नीचे है। पिछले दिनों नेपाल से बहकर आए चार शवों की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है, जिसके लिए नेपाली प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है। नेपाल में बागमती, कोसी और गंडक जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण भारत के सीमावर्ती राज्यों, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है। बैराजों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के चलते भारतीय तराई क्षेत्रों में जलभराव और कटाव का खतरा बढ़ गया है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष (सिंचाई खंड-2) की रिपोर्ट के अनुसार, महराजगंज और नेपाल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित हैं। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 1,02,100 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है, जिसमें बढ़ोतरी देखी जा रही है। अपस्ट्रीम का जलस्तर 110.41 मीटर और डाउनस्ट्रीम का 106.89 मीटर दर्ज किया गया है। त्रिमुहानी घाट पर रोहिन नदी का जलस्तर 78.38 मीटर पर स्थिर है, जो खतरे के निशान (82.44 मीटर) से काफी नीचे है। रतनपुर स्थित रोहिन बैराज से 1,038 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। महाव नाले का जलस्तर बढ़कर 4 फीट पर पहुंच गया है, जबकि इसका खतरे का निशान 5 फीट है। रिगोली में राप्ती नदी (76.42 मीटर) और प्यास नदी (100.80 मीटर) का जलस्तर घट रहा है। जिलाधिकारी महराजगंज गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि सभी तटबंध सुरक्षित हैं और प्रत्येक हलचल पर निगरानी के लिए टीमें लगाई गई हैं। सोहगीबरवा क्षेत्र के निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।































