रांची। झारखंड की राजधानी रांची में बारिश के मौसम के साथ ही संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। यहां दूषित पानी और जलजमाव के कारण लेप्टोस्पायरोसिस नाम की बीमारी का खतरा तेजी से फैल रहा है। रांची के एक निजी अस्पताल में बीते दो महीनों के भीतर 130 से ज्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में आकर इलाज कराने पहुंचे। डॉक्टरों के अनुसार, इस संक्रामक बीमारी के फैलने का मुख्य स्रोत संक्रमित चूहे और अन्य जानवर हैं। गंदे पानी और मिट्टी के संपर्क में आने से ये बैक्टीरिया इंसानों के शरीर में प्रवेश कर जाता है, जिससे लोगों में खौफ का माहौल बना हुआ है।
कैसे फैलता है लेप्टोस्पायरोसिस का संक्रमण?
लेप्टोस्पायरोसिस एक जूनोटिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से चूहों, कुत्तों, मवेशियों और सूअरों जैसे संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित हुए पानी या मिट्टी के जरिए इंसानों में फैलती है। डॉक्टरों के अनुसार, बारिश में चूहों का पेशाब पानी और मिट्टी में मिल जाता है। जलजमाव वाले स्थानों पर नंगे पैर चलने, लंबे समय तक गंदे पानी में रहने या शरीर में कटे-घाव होने पर यह बैक्टीरिया इंसानी शरीर में तेजी से प्रवेश कर जाता है।
सामान्य बुखार जैसे दिखने वाले लक्षण
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बिमलेश कुमार सिंह के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं। अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में तेज दर्द, कमजोरी, उल्टी और आंखों में लालिमा इसके प्रमुख लक्षण हैं। अगर किसी को बुखार के साथ शरीर में तेज दर्द की शिकायत हो तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
संक्रमण से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
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जलजमाव से दूरी: बारिश के मौसम में जलजमाव वाले स्थानों पर जाने से बचें। अगर जाना बेहद जरूरी हो तो रबर के जूते और दस्ताने का इस्तेमाल करें।
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घाव को ढंक कर रखें: शरीर पर अगर कोई कट या घाव हो तो उसे हमेशा ढंककर रखें ताकि दूषित पानी सीधे संपर्क में न आए।
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स्वच्छता और सफाई: दूषित पानी के संपर्क में आने के बाद शरीर को साबुन से अच्छी तरह धोएं, घर के पास साफ-सफाई रखें और चूहों को दूर रखने के उपाय करें।
अनदेखी पड़ेगी भारी, लिवर-किडनी पर असर
चिकित्सकों ने सलाह दी है कि बारिश के बाद ऐसे लक्षण दिखने पर इसे महज सामान्य बुखार मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संक्रमण की स्थिति गंभीर होने पर यह बीमारी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे किडनी और लिवर को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराकर तुरंत इलाज कराने की जरूरत पड़ सकती है।




























