
बलरामपुर जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के प्रयास अब रंग ला रहे हैं। ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और जर्जर तारों व खंभों को बदलने का काम तेजी से जारी है। तुलसीपुर, उतरौला और बलरामपुर डिविजन में बिजनेस प्लान के तहत हो रहे इन कार्यों से कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिली है। जिन मोहल्लों में अधिक लोड के कारण ट्रांसफार्मर प्रभावित हो रहे थे, वहां अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली का भार वितरित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दो सौ से अधिक ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है। विभाग का दावा है कि इन उपायों से अधिकांश स्थानों पर लो-वोल्टेज की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। अब बिजली विभाग का ध्यान बिजली की खपत और बिल जमा करने के बीच के बड़े अंतर पर केंद्रित है। विभाग ने उन गांवों की पहचान करना शुरू कर दिया है, जहां बिजली का उपयोग तो भरपूर हो रहा है, लेकिन बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या बहुत कम है। जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने बताया कि ऐसे गांवों की सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई गांवों में लगभग 50 बिजली कनेक्शन हैं, लेकिन नियमित रूप से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या केवल दो है। ऐसे गांवों में अब बिजली बिल की वसूली को लेकर सख्ती बरती जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, बिजली सुधार के साथ-साथ राजस्व वसूली को भी प्राथमिकता दी जा रही है। एक तरफ जहां उपभोक्ताओं को बेहतर और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली का उपयोग करने वाले प्रत्येक उपभोक्ता से समय पर बिल जमा कराने की व्यवस्था को भी प्रभावी बनाया जाएगा।
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