श्रावस्ती जनपद के तहसील इकौना क्षेत्र में सिसवारा घाट का पुल पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। हालांकि, पुल के पास बनाई गई सड़क के किनारे अब राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही है। नदी का पानी सड़क के काफी करीब पहुंच चुका है, जिससे आने वाले समय में सड़क के कटकर नदी की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह लगातार कटान जारी रहा तो जल्द ही सड़क को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ऐसा होने पर इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कटान को देखते हुए जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग के निर्देश पर यहां बचाव कार्य कराया जा रहा है। मजदूर दिनभर बोरियों में मिट्टी भरकर नदी के किनारे डाल रहे हैं और कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सुबह से शाम तक मजदूर बोरियों में मिट्टी भरकर लगाते हैं, लेकिन अगले दिन जब वे मौके पर पहुंचते हैं तो कई बोरियां नदी में बह चुकी होती हैं। ऐसे में लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। आने वाला समय बताएगा कि राप्ती नदी का कटान सड़क तक पहुंच पाता है या प्रशासन समय रहते मजबूत बांध और सुरक्षा व्यवस्था तैयार कर इस सड़क को बचाने में कामयाब होता है।
सिसवारा घाट पुल के पास राप्ती नदी का कटान बढ़ा:नवनिर्मित सड़क पर खतरा, बचाव कार्य जारी
श्रावस्ती जनपद के तहसील इकौना क्षेत्र में सिसवारा घाट का पुल पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। हालांकि, पुल के पास बनाई गई सड़क के किनारे अब राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही है। नदी का पानी सड़क के काफी करीब पहुंच चुका है, जिससे आने वाले समय में सड़क के कटकर नदी की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह लगातार कटान जारी रहा तो जल्द ही सड़क को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ऐसा होने पर इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कटान को देखते हुए जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग के निर्देश पर यहां बचाव कार्य कराया जा रहा है। मजदूर दिनभर बोरियों में मिट्टी भरकर नदी के किनारे डाल रहे हैं और कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सुबह से शाम तक मजदूर बोरियों में मिट्टी भरकर लगाते हैं, लेकिन अगले दिन जब वे मौके पर पहुंचते हैं तो कई बोरियां नदी में बह चुकी होती हैं। ऐसे में लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। आने वाला समय बताएगा कि राप्ती नदी का कटान सड़क तक पहुंच पाता है या प्रशासन समय रहते मजबूत बांध और सुरक्षा व्यवस्था तैयार कर इस सड़क को बचाने में कामयाब होता है।





























