बस्ती के विक्रमजोत में छतौना पीपा पुल में फंसकर 14 भैंसों की मौत हो गई। इनमें से 7 भैंसें पहले मिल गई थीं, जबकि बाकी 7 को मंगलवार को ग्रामीणों और अधिकारियों की मदद से निकाला गया। विक्रमजोत गांव के लोग रोज अपने मवेशियों को नदी पार माझा में चराने भेजते थे। शाम को ये जानवर वापस घर आ जाते थे। रविवार को कुछ जानवरों के घर लौटने के बाद भी कई जानवर नहीं लौटे। पशुपालकों ने रात भर उनकी तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। सुबह लोगों ने देखा कि नदी में बने पीपे के पुल में कई भैंसें फंसी हुई थीं और मर चुकी थीं। तेज बहाव के कारण जानवर पीपे में फंस गए थे। इन जानवरों में जगदंबा यादव की एक भैंस, माझा लाल निषाद की दो बछिया, सताऊ की एक भैंस और एक बछिया, ललकू की एक भैंस और एक बछिया, बराना देवी की एक भैंस, भल्लन की एक भैंस, वीरेंद्र यादव की एक बछिया और राम भजन की एक भैंस और एक बछिया शामिल थीं। बाकी 7 मरे हुए जानवरों को खोजने के लिए मंगलवार सुबह से देर रात तक अभियान चला। विक्रमजोत पुलिस चौकी से एसआई सूर्यभान शर्मा, हेड कांस्टेबल रवि प्रताप सिंह, कांस्टेबल हरिनारायण, विक्रमजोत के पशु चिकित्सा अधिकारी राम मूर्ति वर्मा, लेखपाल गुलजार और लेखपाल दीपिका सिंह मौके पर पहुंचे। पीपा पुल से जुड़े ठेकेदार भी मौजूद थे। ग्रामीणों की मदद से पुल के पीपे हटाए गए और बाकी 7 भैंसें निकाली गईं। पशु-चिकित्सक राम मूर्ति वर्मा पोस्टमार्टम के लिए विसरा अपने साथ ले गए।





















