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लाला अमरनाथ की कप्तानी में रचा गया इतिहास, भारत ने जीती अपनी पहली टेस्ट सीरीज

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News Desk

भारतीय क्रिकेट टीम आज विश्व की सबसे सशक्त और लोकप्रिय टीमों में शीर्ष पर गिनी जाती है। हालांकि, इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचने की नींव जिन महान विभूतियों ने रखी, उनमें लाला अमरनाथ का नाम सबसे आगे आता है। एक चतुर कप्तान, शानदार बल्लेबाज और बहुमुखी प्रतिभा के धनी खिलाड़ी के रूप में उन्होंने भारतीय क्रिकेट के उत्थान में अपना अतुलनीय योगदान दिया।

22 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण और 19 वर्षों का यादगार सफर

लाला अमरनाथ का जन्म 11 सितंबर 1911 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव था। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और विकेटकीपिंग तीनों ही विधाओं में निपुण होने के कारण उन्हें एक मुकम्मल क्रिकेटर माना जाता था। उन्होंने महज 22 वर्ष की आयु में 1933 में इंग्लैंड के विरुद्ध अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। लगभग 19 वर्षों तक चले अपने करियर में उन्होंने 24 टेस्ट मैचों की 40 पारियों में एक शतक और चार अर्धशतकों की मदद से 878 रन बनाए। इसके साथ ही एक ऑलराउंडर के रूप में उन्होंने 45 टेस्ट विकेट भी अपने नाम किए, जिसमें दो बार एक ही पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा शामिल है।

स्वतंत्र भारत के पहले कप्तान और पाकिस्तान पर ऐतिहासिक सीरीज जीत

भारतीय क्रिकेट में लाला अमरनाथ के नाम कई अविस्मरणीय कीर्तिमान दर्ज हैं। वे स्वतंत्र भारत की क्रिकेट टीम के पहले कप्तान बने। उन्हीं के कुशल नेतृत्व में भारत ने अपनी पहली ऐतिहासिक टेस्ट शृंखला जीती थी। वर्ष 1952 में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने भारत आई पाकिस्तानी टीम को अमरनाथ की कप्तानी में भारत ने 2-1 से शिकस्त दी थी। इस यादगार शृंखला के समापन के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

भारत का पहला टेस्ट शतक और क्रिकेट के प्रचार-प्रसार में अतुल्य योगदान

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक लगाने का गौरव भी लाला अमरनाथ के ही नाम है। उन्होंने 17 दिसंबर 1933 को इंग्लैंड के खिलाफ यह ऐतिहासिक पारी खेली थी। संन्यास लेने के बाद भी वे भारतीय टीम से जुड़े रहे और 1954-55 के पाकिस्तान दौरे पर टीम के प्रबंधक की भूमिका निभाई। उनके करिश्माई व्यक्तित्व का ही असर था कि उस दौर में युवाओं ने हॉकी छोड़कर क्रिकेट की ओर रुख करना शुरू कर दिया। उनके पुत्र सुरिंदर अमरनाथ और मोहिंदर अमरनाथ ने भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया, जबकि तीसरे पुत्र राजिंदर अमरनाथ प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे। 5 अगस्त 2000 को 88 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में इस महान दिग्गज का निधन हुआ। खेल में उनके सर्वोच्च योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1991 में 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया था।