यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर शुक्रवार को बुलाई गई देशव्यापी बैंक हड़ताल से सरकारी बैंकों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। बैंक कर्मचारी 5-दिवसीय कार्य सप्ताह को तत्काल प्रभाव से लागू करने और वेतन व पेंशन से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की मांग पर अड़े हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ताले, निजी बैंकों पर नहीं पड़ा कोई असर
यूएफबीयू सात प्रमुख बैंक संघों का एक शीर्ष संगठन है, जो देश के लगभग 90 प्रतिशत बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। इस हड़ताल के चलते देश भर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अधिकांश शाखाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहीं। हालांकि, निजी क्षेत्र के व्यावसायिक बैंकों के रोज़मर्रा के कामकाज पर इस हड़ताल का कोई विशेष प्रभाव नहीं देखा गया।
क्यों बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल? जानिए मुख्य कारण
बैंक यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग सभी शनिवारों को आधिकारिक अवकाश घोषित करने की है। संघों के अनुसार, मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के साथ हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में इस मांग पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन सरकार की ओर से अधिसूचना जारी न होने के कारण यह अब तक लागू नहीं हो सकी है। वर्तमान में बैंकों में केवल दूसरे और चौथे शनिवार को ही छुट्टी रहती है। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने स्पष्ट किया कि सरकार की अनदेखी के चलते कर्मचारियों को मजबूरन हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।
पेंशन सुधार और एनपीएस से ओपीएस में वापसी समेत अन्य मांगें
5-डे वर्किंग के अलावा, बैंक कर्मियों की अन्य प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजनाओं में सुधार और सभी पेंशनभोगियों के लिए एक समान महंगाई भत्ता (DA) फॉर्मूला लागू करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत कार्यरत कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) चुनने का विकल्प दिए जाने की मांग भी लंबे समय से लंबित है। कर्मचारियों का कहना है कि अन्य क्षेत्रों की तुलना में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
डिजिटल बैंकिंग चालू, चेक क्लियरिंग और नकद निकासी सेवाएं प्रभावित
हड़ताल के कारण शाखाओं में नकद जमा, निकासी, चेक क्लियरिंग और प्रशासनिक काम पूरी तरह ठप रहे। हालांकि, यूपीआई (UPI), एटीएम (ATM) और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समेत अधिकांश सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों को हड़ताल से होने वाली संभावित असुविधा के संबंध में पहले ही परामर्श जारी कर दिया था।





































