UP: बाराबंकी तहसील रामनगर क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान से ऊपर बने रहने के कारण बाढ़ प्रभावित गांवों में संकट बरकरार है। नदी का जलस्तर घटने के साथ अब किनारों पर कटान तेज हो गया है। सुंदरनगर, कोड़ी, ललपुरवा मजरा बतनेरा, सरसंडा और उधिया गांव जलभराव से प्रभावित हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से विस्थापित किया है।
प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ प्रभावित करीब 1500 लोगों के लिए सुबह नाश्ता तथा दोपहर और शाम के भोजन की व्यवस्था की गई है। प्रभावित ग्रामीणों के आवागमन के लिए बतनेरा, जमका, डिहुवा, विझला और बल्लोपुर में आवश्यकतानुसार 17 नावों का संचालन कराया जा रहा है। प्रशासन और राजस्व विभाग की टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी कर रही हैं।
Also Read: वाराणसी में फिर बढ़ा गंगा का जलस्तर, 84 घाट डूबे, 12 सितंबर तक 71 मीटर पहुंचने की आशंका
सबसे गंभीर स्थिति राजस्व ग्राम उधिया (हेतमापुर) में बनी हुई है, जहां सरयू नदी का कटान लगातार जारी है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड बाराबंकी की ओर से बचाव कार्य किए जा रहे हैं। इसके बावजूद नदी की धारा लगातार जमीन को काट रही है। प्रशासन के अनुसार शुक्रवार को कटान की चपेट में आने से 12 पक्के मकान और एक झोपड़ी समेत कुल 13 मकान सरयू नदी में समाहित हो गए। इससे प्रभावित परिवारों में दहशत का माहौल है।
कटान से प्रभावित मकान मालिकों को अहैतुक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इससे पहले नदी कटान से प्रभावित 10 परिवारों अथवा व्यक्तियों को अहैतुक सहायता प्रदान की जा चुकी है। प्रशासन द्वारा कटान प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन की प्रक्रिया भी कराई जा रही है।
उधर, एल्गिन ब्रिज-संजय सेतु के पास केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार दोपहर 12 बजे सरयू नदी का जलस्तर 106.080 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के लाल निशान 106.070 मीटर से एक सेंटीमीटर ऊपर है। फिलहाल जलस्तर स्थिर बताया गया है। नदी के घटते जलस्तर के बीच कटान बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह, एसडीएम आकांक्षा गुप्ता और तहसीलदार विपुल सिंह समेत अधिकारी लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं।








































