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*26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का अल्टीमेटम*
लंबे समय से लंबित मांगों की उपेक्षा से आक्रोशित देश के 9 लाख से अधिक बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ हुंकार भर दी है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित इस हड़ताल का व्यापक असर दिखा। गोरखपुर के बैंक रोड स्थित मुख्य शाखा परिसर से निकली आक्रोश रैली ने न केवल प्रशासनिक गलियारों की नींद उड़ाई, बल्कि अकेले गोरखपुर मंडल में ही 500 करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग कारोबार प्रभावित कर दिया। इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी ताकत महिला कर्मचारियों का नेतृत्व रहा, जिन्होंने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर सरकार को अपनी एकजुटता का कड़ा संदेश दिया।
वादाखिलाफी और ढुलमुल रवैये से उपजा आक्रोश
बैंक यूनियनों का मुख्य असंतोष 5-दिवसीय कार्यप्रणाली (5-Day Work Week) को लागू करने में हो रही अनावश्यक देरी को लेकर है।
मार्च 2024 का ऐतिहासिक समझौता: सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति बनी थी कि सभी शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाएगा और इसकी एवज में बैंककर्मी प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करेंगे।
अधर में अटका क्रियान्वयन: समझौता हुए ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा अधिसूचना जारी न करना कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है।
विभेदकारी PLI: परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) के वितरण में व्याप्त भारी विषमता और अन्य लंबित मांगों को अनसुना किए जाने से कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
आर-पार की लड़ाई: आंदोलन का चरणबद्ध रोडमैप
UFBU नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि यह हड़ताल कर्मचारियों की स्वेच्छा नहीं, बल्कि प्रशासनिक बेरुखी के कारण थोपी गई मजबूरी है। मांगों पर ठोस निर्णय न होने की स्थिति में आंदोलन को तीन चरणों में तीव्र किया जाएगा:
11 सितंबर 2026: सफल 1-दिवसीय सांकेतिक हड़ताल और विशाल प्रदर्शन।
28, 29 एवं 30 सितंबर 2026: 3-दिवसीय पूर्ण राष्ट्रव्यापी कामकाज बंद आंदोलन।
26 अक्टूबर 2026 से: मांगें न पूरी होने की स्थिति में देशभर में अनिश्चितकालीन तालाबंदी।
नेतृत्व की हुंकार और भावी रणनीति
अष्टमंडल उपाध्यक्ष एस.पी. त्रिपाठी की अध्यक्षता और रविकांत दुबे के संचालन में आयोजित इस विशाल जनसभा को एसबीआई स्टाफ एसोसिएशन के उप महामंत्री राहुल कुमार गुप्ता, यूएफबीयू गोरखपुर के संयोजक यू.पी.एन. सिंह, यूनियन बैंक के सचिव पुनीत धर दुबे, केनरा बैंक के क्षेत्रीय सचिव विवेक कुमार तथा अन्य बैंक यूनियनों के शीर्ष पदाधिकारियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने हठधर्मिता छोड़कर समझौते को तुरंत धरातल पर नहीं उतारा, तो आने वाले दिनों में देश की आर्थिक गतिविधियों की पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।





































