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बस्ती के कप्तानगंज ब्लॉक की लहिलवारा गांव की 33 वर्षीय प्रियंका ने पशुपालन से जिंदगी बदल दी है। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 3 लाख रुपये लगाकर यह काम शुरू किया। उनके पति राकेश कुमार पहले बाहर काम करते थे। प्रियंका ने अकेले ही जिम्मेदारी संभाली, पर काम बढ़ने पर पति भी घर लौट आए। अब दोनों मिलकर पशुपालन कर रहे हैं। उनके पास 10 भैंस और चार छोटे पशु हैं। खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की कमाई होती है। सुबह का दूध फार्म से और शाम का दूध बाजार में बिकता है। गोबर से भी अलग से कमाई होती है। समूह की महिलाएं गोबर से खाद बनाती हैं, एक ट्रॉली 2500 रुपये में बिकती है। प्रियंका का सुझाव है कि मनरेगा के तहत गोबर खाद बनाने का इंतजाम हो, जिससे महिलाओं को आय मिले और जैविक खेती बढ़े।
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