शंकरपुर में बिजली सप्लाई को लेकर लोगों की शिकायतें लगातार आ रही हैं। बार-बार बिजली गुल होने और कटने की समस्या ने सप्लाई व्यवस्था के रखरखाव और विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई इलाकों में शिकायत के बाद बिजली आती तो है, लेकिन कुछ समय बाद फिर चली जाती है। इससे लोगों को स्थायी राहत नहीं मिल पा रही है। बिजली संकट का असर सिर्फ घरों तक ही सीमित नहीं है। सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटर, ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने से लगातार बिजली मिलना जरूरी हो गया है। बिजली बंद होने पर प्रमाण पत्र, राजस्व से जुड़े काम, ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेज बनाने जैसे कई सरकारी काम रुक जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी बिजली बहुत जरूरी है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कंप्यूटर सिस्टम, जांच के उपकरण और बाकी जरूरी चीजें बिजली पर ही चलती हैं। ऐसे में बार-बार बिजली कटने से मरीजों और उनके साथ आए लोगों में चिंता बढ़ रही है। हालांकि, किसी खास अस्पताल में सेवाएं कितनी प्रभावित हुईं, यह संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयान से ही साफ हो पाएगा। बिजली सप्लाई बंद होने का असर दुकानदारों, छोटे व्यापारियों और बिजली पर चलने वाले दूसरे संस्थानों पर भी पड़ रहा है। मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक सामान से जुड़े कारोबार में बिजली न होने पर काम रुक जाता है और आर्थिक नुकसान हो सकता है। व्यापारियों का कहना है कि अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रही, तो इसका सीधा असर उनकी रोज की कमाई पर पड़ेगा। अब मुख्य सवाल यह है कि बिजली सप्लाई में यह दिक्कत क्यों आ रही है। अगर किसी इलाके में बार-बार फॉल्ट हो रहा है, तो क्या इसकी वजह पुरानी लाइनें, ट्रांसफार्मर की क्षमता, ओवरलोडिंग, उपकरणों की खराबी या रखरखाव की कमी है? अगर विभाग के पास इन समस्याओं और फॉल्ट का रिकॉर्ड है, तो उसके आधार पर स्थायी सुधार के लिए क्या योजना बनाई गई है?




































