सिद्धार्थनगर के खेसरहा क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत बकैनिहा में एक नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले आठ वर्षों से अनुपयोगी पड़ा है। भवन का निर्माण पूरा होने के बावजूद इसे संबंधित विभाग को आज तक हैंडओवर नहीं किया गया है। लाखों रुपये की लागत से तैयार यह भवन बच्चों और महिलाओं के उपयोग में नहीं आ पा रहा है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री मिथिलेश मिश्रा ने बताया कि भवन का निर्माण लगभग आठ वर्ष पूर्व पूर्व प्रधान दिलीप पांडे के कार्यकाल में हुआ था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उम्मीद थी कि इसे जल्द ही विभाग को सौंप दिया जाएगा, लेकिन हैंडओवर की प्रक्रिया अब तक लंबित है। इस कारण आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन पुराने या वैकल्पिक स्थानों से करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा तथा गर्भवती व धात्री महिलाओं को आवश्यक सेवाएं प्रदान करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कराती है। बकैनिहा में भवन तैयार होने के बावजूद विभागीय प्रक्रियाओं के अभाव में इसका उपयोग न होना इन उद्देश्यों को बाधित कर रहा है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिलीप प्रसाद ने इस संबंध में बताया कि भवन को विभाग के स्तर पर हैंडओवर कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि लंबित प्रक्रियाओं को पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन नए भवन से शुरू हो सके। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कराने और भवन को तत्काल संबंधित विभाग को हैंडओवर करने की मांग की है। उनका कहना है कि आठ साल से तैयार भवन का यूं ही बेकार पड़ा रहना सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आठ साल से खड़ा आंगनबाड़ी भवन:बकैनिहा में विभाग को हैंडओवर न होने से अनुपयोगी
सिद्धार्थनगर के खेसरहा क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत बकैनिहा में एक नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले आठ वर्षों से अनुपयोगी पड़ा है। भवन का निर्माण पूरा होने के बावजूद इसे संबंधित विभाग को आज तक हैंडओवर नहीं किया गया है। लाखों रुपये की लागत से तैयार यह भवन बच्चों और महिलाओं के उपयोग में नहीं आ पा रहा है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री मिथिलेश मिश्रा ने बताया कि भवन का निर्माण लगभग आठ वर्ष पूर्व पूर्व प्रधान दिलीप पांडे के कार्यकाल में हुआ था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उम्मीद थी कि इसे जल्द ही विभाग को सौंप दिया जाएगा, लेकिन हैंडओवर की प्रक्रिया अब तक लंबित है। इस कारण आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन पुराने या वैकल्पिक स्थानों से करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा तथा गर्भवती व धात्री महिलाओं को आवश्यक सेवाएं प्रदान करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कराती है। बकैनिहा में भवन तैयार होने के बावजूद विभागीय प्रक्रियाओं के अभाव में इसका उपयोग न होना इन उद्देश्यों को बाधित कर रहा है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिलीप प्रसाद ने इस संबंध में बताया कि भवन को विभाग के स्तर पर हैंडओवर कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि लंबित प्रक्रियाओं को पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन नए भवन से शुरू हो सके। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कराने और भवन को तत्काल संबंधित विभाग को हैंडओवर करने की मांग की है। उनका कहना है कि आठ साल से तैयार भवन का यूं ही बेकार पड़ा रहना सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
































