सिद्धार्थनगर के मोहाना थाना क्षेत्र के छोटकी बेलहरी गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हुए खूनी संघर्ष में घायल जमाल अहमद की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी। मंगलवार को मोहाना पुलिस ने मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर मारपीट में इस्तेमाल किए गए बांस का मोटा डंडा, यूकेलिप्टस का डंडा और स्टील का पाइप भी बरामद किया। अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार ने इस मामले का खुलासा किया। यह घटना 26 जून की सुबह करीब 8:30 बजे छोटकी बेलहरी चौराहे के पास हुई थी। पुलिस के मुताबिक, पुरानी रंजिश के चलते दो पक्षों में विवाद हुआ था। देखते ही देखते दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। लाठी-डंडों से हुए हमले में जमाल अहमद के सिर में गंभीर चोट लगी थी। मारपीट का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें दोनों पक्षों के लोग लाठी-डंडों से एक-दूसरे को पीटते दिख रहे थे। इस दौरान कई लोग घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल जमाल अहमद को पहले अस्पताल ले जाया गया। बाद में उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में भर्ती कराया गया। 18 जुलाई को इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वह घर लौट आए। हालांकि, उनकी तबीयत फिर से खराब हो गई। परिजन उन्हें सिद्धार्थनगर के जिला अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उन्हें बड़े अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने जमाल अहमद को लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। 28/29 अगस्त की रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जमाल अहमद की मौत के बाद पुलिस ने पहले दर्ज मुकदमे में गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराएं बढ़ा दीं। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम सक्रिय हो गई। 1 सितंबर को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि मामले से जुड़े आरोपी सड्डा तिराहे पर खड़े हैं और सवारी का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी नेपाल भागने की कोशिश में थे। सूचना मिलते ही मोहाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, घेराबंदी की और आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किए गए तीन डंडे-पाइप भी बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में जुबेर अहमद पुत्र रहमतुल्लाह, क्यूम अहमद पुत्र मकसूद अली, इमरान अहमद पुत्र महबुद अहमद उर्फ महबूब, कमरूद्दीन उर्फ रियाज पुत्र महबूब उर्फ महबुद, महबुद उर्फ महबूब पुत्र मोहम्मद हनीफ उर्फ मगर, सफीउल्लाह पुत्र सकूर, मोहम्मद आरिफ पुत्र सफीउल्लाह और हफीजुल्लाह उर्फ हाफू पुत्र सकूर शामिल हैं। सभी आरोपी बर्डपुर नंबर-5 के टोला छोटकी बेलहरी, थाना मोहाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। इस मामले में पुलिस ने घटना के दिन 26 जून को ही मुकदमा दर्ज किया था। शिकायत के आधार पर आरोपियों पर एकजुट होकर मारपीट करने, लाठी-डंडों से हमला कर चोट पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। पहले मुकदमे में 11 लोगों को नामजद किया गया था। जमाल अहमद की मौत के बाद मुकदमे में गैर इरादतन हत्या से संबंधित प्रावधान भी जोड़े गए। अब पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सफीउल्लाह का वर्ष 2008 का भी एक आपराधिक मामला दर्ज है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार सभी आरोपियों को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद न्यायालय भेजा जा रहा है। कार्रवाई करने वाली टीम में थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह, चौकी प्रभारी शुद्धोधन उपनिरीक्षक जगतनारायण यादव, उपनिरीक्षक अवधेश कुमार, हेड कांस्टेबल राजेश कुमार सिंह, कनिकलाल मल्ल, जयप्रकाश यादव, रामाज्ञा पासवान और कांस्टेबल धनंजय सिंह यादव शामिल रहे। मामले में पुलिस की कार्रवाई जमाल अहमद की मौत के बाद तेज हुई है।
पुरानी रंजिश में मारपीट के बाद घायल की मौत:सिद्धार्थनगर में 8 आरोपी गिरफ्तार, लाठी-डंडे और स्टील पाइप बरामद
सिद्धार्थनगर के मोहाना थाना क्षेत्र के छोटकी बेलहरी गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हुए खूनी संघर्ष में घायल जमाल अहमद की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी। मंगलवार को मोहाना पुलिस ने मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर मारपीट में इस्तेमाल किए गए बांस का मोटा डंडा, यूकेलिप्टस का डंडा और स्टील का पाइप भी बरामद किया। अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार ने इस मामले का खुलासा किया। यह घटना 26 जून की सुबह करीब 8:30 बजे छोटकी बेलहरी चौराहे के पास हुई थी। पुलिस के मुताबिक, पुरानी रंजिश के चलते दो पक्षों में विवाद हुआ था। देखते ही देखते दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। लाठी-डंडों से हुए हमले में जमाल अहमद के सिर में गंभीर चोट लगी थी। मारपीट का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें दोनों पक्षों के लोग लाठी-डंडों से एक-दूसरे को पीटते दिख रहे थे। इस दौरान कई लोग घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल जमाल अहमद को पहले अस्पताल ले जाया गया। बाद में उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में भर्ती कराया गया। 18 जुलाई को इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वह घर लौट आए। हालांकि, उनकी तबीयत फिर से खराब हो गई। परिजन उन्हें सिद्धार्थनगर के जिला अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उन्हें बड़े अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने जमाल अहमद को लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। 28/29 अगस्त की रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जमाल अहमद की मौत के बाद पुलिस ने पहले दर्ज मुकदमे में गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराएं बढ़ा दीं। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम सक्रिय हो गई। 1 सितंबर को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि मामले से जुड़े आरोपी सड्डा तिराहे पर खड़े हैं और सवारी का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी नेपाल भागने की कोशिश में थे। सूचना मिलते ही मोहाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, घेराबंदी की और आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किए गए तीन डंडे-पाइप भी बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में जुबेर अहमद पुत्र रहमतुल्लाह, क्यूम अहमद पुत्र मकसूद अली, इमरान अहमद पुत्र महबुद अहमद उर्फ महबूब, कमरूद्दीन उर्फ रियाज पुत्र महबूब उर्फ महबुद, महबुद उर्फ महबूब पुत्र मोहम्मद हनीफ उर्फ मगर, सफीउल्लाह पुत्र सकूर, मोहम्मद आरिफ पुत्र सफीउल्लाह और हफीजुल्लाह उर्फ हाफू पुत्र सकूर शामिल हैं। सभी आरोपी बर्डपुर नंबर-5 के टोला छोटकी बेलहरी, थाना मोहाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। इस मामले में पुलिस ने घटना के दिन 26 जून को ही मुकदमा दर्ज किया था। शिकायत के आधार पर आरोपियों पर एकजुट होकर मारपीट करने, लाठी-डंडों से हमला कर चोट पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। पहले मुकदमे में 11 लोगों को नामजद किया गया था। जमाल अहमद की मौत के बाद मुकदमे में गैर इरादतन हत्या से संबंधित प्रावधान भी जोड़े गए। अब पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सफीउल्लाह का वर्ष 2008 का भी एक आपराधिक मामला दर्ज है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार सभी आरोपियों को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद न्यायालय भेजा जा रहा है। कार्रवाई करने वाली टीम में थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह, चौकी प्रभारी शुद्धोधन उपनिरीक्षक जगतनारायण यादव, उपनिरीक्षक अवधेश कुमार, हेड कांस्टेबल राजेश कुमार सिंह, कनिकलाल मल्ल, जयप्रकाश यादव, रामाज्ञा पासवान और कांस्टेबल धनंजय सिंह यादव शामिल रहे। मामले में पुलिस की कार्रवाई जमाल अहमद की मौत के बाद तेज हुई है।






























