श्रावस्ती के नासिरगंज में 17 रबी-उल-अव्वल को जश्न-ए-सादिक़ैन के मुबारक मौके पर एक भव्य महफिल का आयोजन किया गया। यह महफिल मारूफ शायर-ए-अहलेबैत जनाब अम्मार रिज़वी के अज़ाखाने पर मुनअक़िद हुई, जिसमें शायरों ने पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद-ए-मुस्तफा (स.अ.) और इमाम जाफ़र-ए-सादिक (अ.स.) को अकीदत के नज़राने पेश किए। महफिल का आगाज़ तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुआ। इसके बाद हज़रात-ए-मासूमीन की शान में मनक़बत, नात और ग़ज़लों का सिलसिला देर तक जारी रहा, जिससे माहौल पुरनूर हो गया। इस महफिल में इलाके के कई नामवर शायर-ए-अहलेबैत शामिल हुए। इनमें जनाब अम्मार रिज़वी, जनाब सक़लैन नक़वी, जनाब रेहान, जनाब शाहरुख़ हैदर, जनाब बाबर रिज़वी और जनाब वक़ार हैदर प्रमुख थे। सभी शोरा-ए-किराम ने अपने-अपने कलाम के माध्यम से पैग़म्बर-ए-इस्लाम और इमाम जाफ़र-ए-सादिक की बारगाह में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। जनाब अम्मार रिज़वी के कलाम को सामईन ने विशेष रूप से सराहा और उन्हें खूब दाद-ओ-तहसीन से नवाज़ा। महफिल में मोमिनीन की अच्छी तादाद मौजूद रही। कार्यक्रम का समापन दुआ-ए-सलामती-ए-इमाम-ए-ज़माना और मुल्क में अमन-ओ-अमान की दुआ के साथ हुआ। इसके बाद लंगर-ए-तबर्रुक का भी इंतज़ाम किया गया।
श्रावस्ती के नासिरगंज में जश्न-ए-ईद-ए-मिलादुन्नबी:अम्मार रिजवी के अजाखाने में शायरों ने अकीदत के नज़राने पेश किए
श्रावस्ती के नासिरगंज में 17 रबी-उल-अव्वल को जश्न-ए-सादिक़ैन के मुबारक मौके पर एक भव्य महफिल का आयोजन किया गया। यह महफिल मारूफ शायर-ए-अहलेबैत जनाब अम्मार रिज़वी के अज़ाखाने पर मुनअक़िद हुई, जिसमें शायरों ने पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद-ए-मुस्तफा (स.अ.) और इमाम जाफ़र-ए-सादिक (अ.स.) को अकीदत के नज़राने पेश किए। महफिल का आगाज़ तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुआ। इसके बाद हज़रात-ए-मासूमीन की शान में मनक़बत, नात और ग़ज़लों का सिलसिला देर तक जारी रहा, जिससे माहौल पुरनूर हो गया। इस महफिल में इलाके के कई नामवर शायर-ए-अहलेबैत शामिल हुए। इनमें जनाब अम्मार रिज़वी, जनाब सक़लैन नक़वी, जनाब रेहान, जनाब शाहरुख़ हैदर, जनाब बाबर रिज़वी और जनाब वक़ार हैदर प्रमुख थे। सभी शोरा-ए-किराम ने अपने-अपने कलाम के माध्यम से पैग़म्बर-ए-इस्लाम और इमाम जाफ़र-ए-सादिक की बारगाह में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। जनाब अम्मार रिज़वी के कलाम को सामईन ने विशेष रूप से सराहा और उन्हें खूब दाद-ओ-तहसीन से नवाज़ा। महफिल में मोमिनीन की अच्छी तादाद मौजूद रही। कार्यक्रम का समापन दुआ-ए-सलामती-ए-इमाम-ए-ज़माना और मुल्क में अमन-ओ-अमान की दुआ के साथ हुआ। इसके बाद लंगर-ए-तबर्रुक का भी इंतज़ाम किया गया।






























