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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा:कोर्ट ने 20 हजार जुर्माना भी लगाया, घर में घुसकर की थी वारदात

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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा:कोर्ट ने 20 हजार जुर्माना भी लगाया, घर में घुसकर की थी वारदात

श्रावस्ती में नाबालिग से दुष्कर्म के करीब चार साल पुराने मामले में सोमवार को श्रावस्ती की विशेष पॉक्सो अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने मल्हीपुर थाना क्षेत्र के सिटकहना गांव निवासी कन्हैया लाल को दोषी मानते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषी पर 20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। पुलिस के अनुसार, यह फैसला ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान के तहत की गई प्रभावी पैरवी के बाद आया है। घर में घुसकर दुष्कर्म का था आरोप पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 में मल्हीपुर थाने में कन्हैया लाल के खिलाफ मुकदमा संख्या 545/2022 दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसने घर में घुसकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। इसके अलावा पीड़िता से गाली-गलौज करने और जान-माल की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे। इन धाराओं में दर्ज हुआ था केस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 452, 504 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। साक्ष्यों और पैरवी के आधार पर दोषी करार मामला ASJ/SPL पॉक्सो न्यायालय, श्रावस्ती में पहुंचा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रभावी पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कन्हैया लाल को दोषी करार दिया। 20 साल का सश्रम कारावास और जुर्माना अदालत ने दोषी कन्हैया लाल को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले में न्यायालय के फैसले के बाद दोषी को सजा भुगतने के लिए जेल भेजने की कार्रवाई की गई। ऑपरेशन कनविक्शन के तहत हुई पैरवी पुलिस के मुताबिक, एसपी राहुल भाटी गंभीर और चिन्हित मामलों में ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ के तहत स्वयं निगरानी कर रहे हैं। अभियान का उद्देश्य गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी कर आरोपियों को जल्द सजा दिलाना है। इसके लिए मॉनिटरिंग सेल, जिला शासकीय अधिवक्ता और कोर्ट पैरोकारों को लगातार पैरवी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में इस मामले की भी नियमित निगरानी और प्रभावी पैरवी की गई, जिसके बाद अदालत ने आरोपी को कठोर सजा सुनाई।

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