
श्रावस्ती जिले के सोनवा थाना क्षेत्र और गिलौला ब्लॉक की दीकौली ग्राम सभा में बुरवा बाबा की दरगाह पर मेले का आयोजन हुआ। मेले में आसपास के कई गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने बाबा की मजार पर माथा टेककर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। मेले में आस्था के साथ स्थानीय कारोबार भी देखने को मिला। ग्रामीणों ने अलग-अलग तरह की दुकानें लगाईं, जिससे उन्हें रोजगार और आमदनी का अवसर मिला। बाबा की मजार पर माथा टेकने पहुंचे श्रद्धालु मेले में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। आसपास के गांवों से आए लोगों ने बुरवा बाबा की दरगाह पर पहुंचकर मजार पर माथा टेका और अपनी मनोकामनाएं मांगीं। श्रद्धालुओं के आने से दरगाह परिसर और आसपास का इलाका लोगों की आवाजाही से गुलजार रहा। आसपास के कई गांवों से पहुंचते हैं लोग स्थानीय लोगों के मुताबिक बुरवा बाबा की दरगाह पर आयोजित होने वाला मेला आसपास के ग्रामीणों के लिए खास महत्व रखता है। आसपास के कई गांवों के लोग इसमें शामिल होने के लिए पहुंचते हैं। मेले में परिवार के साथ आने वाले लोगों की भी अच्छी संख्या रही। आस्था के साथ ग्रामीणों को मिलता है रोजगार यह मेला केवल श्रद्धालुओं की आस्था से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी का जरिया भी बनता है। मेले के दौरान ग्रामीण अपनी छोटी-छोटी दुकानें लगाते हैं। इससे उन्हें सामान बेचने और आमदनी करने का मौका मिलता है। दुकानों से चलता है कई परिवारों का जीवन-यापन मेले में दुकान लगाने वाले स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की वजह से उनकी बिक्री होती है। इसी आमदनी से कई परिवारों का जीवन-यापन चलता है। स्थानीय लोगों ने बताया मेले का महत्व मेले को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह दिखाई दिया। मुकेश, राम कुमार, रविंद्र, उमेश, मुस्कान और बरकत समेत अन्य लोगों ने बताया कि यह मेला उनके लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने से स्थानीय दुकानदारों को काम मिलता है और गांव के लोगों में भी उत्साह का माहौल रहता है। आस्था और स्थानीय अर्थव्यवस्था का संगम बुरवा बाबा की दरगाह पर लगा मेला ग्रामीण क्षेत्र में आस्था के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। श्रद्धालुओं की आवाजाही से दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और अन्य स्थानीय लोगों को कमाई का अवसर मिलता है। यही वजह है कि ग्रामीण इस मेले का पूरे साल इंतजार करते हैं।
































