
बलरामपुर के रेहरा बाजार क्षेत्र में इन दिनों गन्ने की फसल पर लाल सड़न रोग का खतरा मंडरा रहा है। बरसात के मौसम में खेतों में लगातार बनी नमी और जलभराव की स्थिति इस बीमारी के फैलाव के लिए अनुकूल मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञ लाल सड़न को गन्ने की गंभीर बीमारियों में शामिल करते हैं। इसे कई जगह ‘गन्ने का कैंसर’ भी कहा जाता है। किसानों को आशंका है कि समय रहते रोग पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह तेजी से फैलकर खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। तेजी से बढ़ रही फसल, रोग के खतरे से किसान चिंतित क्षेत्र के किसान प्रमोद, शिवशंकर और झिनकू ने बताया कि इस समय गन्ने की फसल तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में लाल सड़न रोग के फैलने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर तत्काल कदम उठाना जरूरी है, क्योंकि संक्रमण अधिक फैलने के बाद खेत को बचाना मुश्किल हो सकता है। पत्तियां पीली पड़ना लाल सड़न का शुरुआती संकेत विशेषज्ञों के अनुसार लाल सड़न रोग से प्रभावित गन्ने की पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगती हैं। पौधे की सामान्य बढ़वार प्रभावित होती है। संक्रमित गन्ने के तने को काटने पर उसके अंदर लाल रंग दिखाई देता है। लाल हिस्से पर सफेद धब्बे भी नजर आ सकते हैं, जो बीमारी की पहचान में मदद करते हैं। तने में सड़न बढ़े तो आने लगती है बदबू रोग बढ़ने पर गन्ने के अंदर सड़न फैलने लगती है। इसके साथ बदबू भी आने लगती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसे संक्रमित पौधों को खेत में छोड़ने के बजाय तुरंत निकाल देना चाहिए। इन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करना जरूरी है, ताकि संक्रमण आसपास के दूसरे पौधों तक न पहुंचे। जलभराव और ज्यादा नमी से बचाना जरूरी बरसात के मौसम में खेतों में पानी जमा होने से गन्ने की फसल में रोग का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को खेत में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। बेवजह नमी बनी रहने से बचने के साथ संतुलित खाद का इस्तेमाल और फसल चक्र अपनाना भी फसल के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। रोगमुक्त बीज और लगातार निगरानी पर जोर किसानों को गन्ने की बुवाई के लिए प्रमाणित और रोगमुक्त बीज का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। साथ ही खेतों की नियमित निगरानी करते रहने को कहा गया है। अगर किसी पौधे में पत्तियां पीली पड़ने, तने के अंदर लाल रंग या सफेद धब्बे जैसे संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत खेत से निकालकर कृषि विभाग या कृषि रक्षा इकाई से संपर्क करना चाहिए। गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने की मांग किसानों ने कृषि विभाग से गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते किसानों को लाल सड़न रोग की पहचान, बचाव और वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी मिल जाए तो संभावित नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। किसानों ने विभाग से खेतों का निरीक्षण कर आवश्यक सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की भी मांग की है।
































