साऊंघाट ब्लॉक की 11 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इस उपलब्धि पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) साऊंघाट में कार्यक्रम आयोजित कर संबंधित ग्राम प्रधानों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टीबी उन्मूलन अभियान में ग्राम प्रधानों, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए समय पर मरीजों की पहचान, जांच और पूरा इलाज जरूरी है। 11 पंचायतों को टीबी मुक्त होने पर मिला सम्मान सीएचसी साऊंघाट में आयोजित कार्यक्रम में टीबी मुक्त घोषित की गईं ग्राम पंचायतों के प्रधानों को सम्मानित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि ग्राम स्तर पर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मरीजों को जांच व उपचार से जोड़ने में पंचायत प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्राम प्रधानों और स्वास्थ्य कर्मियों की अहम भूमिका सीएचसी अधीक्षक डॉ. शशि कुमार, डॉ. सुनील कुमार और डॉ. श्वेता वर्मा ने कहा कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायत बनाने में ग्राम प्रधानों के साथ स्वास्थ्य विभाग, आशा और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने लगातार काम किया। मरीजों की पहचान से लेकर जांच और इलाज तक स्वास्थ्य टीमों ने अभियान चलाया। ग्रामीण स्तर पर सहयोग मिलने से अभियान को गति मिली। टीबी मुक्त पंचायत बनाना सभी की जिम्मेदारी डॉ. शशि कुमार ने कहा कि किसी ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त बनाना सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें ग्राम पंचायत, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि समय पर टीबी मरीजों की पहचान, जांच और पूरा इलाज कराने से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने प्रधानों से अपने गांव में जागरूकता अभियान जारी रखने की अपील की। इन 11 पंचायतों को किया गया टीबी मुक्त सीएचसी साऊंघाट क्षेत्र की पकरी नासिर, रानीपुर, सोनौरा, दसौती, कडर खास, मरवटिया, खम्हरिया, भीटा रामसेन, परसा हज्जाम, परसा जाफर और बडेरिया खुर्द ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन पंचायतों में बीमारी की पहचान, जांच, इलाज और जागरूकता से जुड़े प्रयासों को उपलब्धि में अहम बताया। प्रधानों को प्रमाण पत्र देकर बढ़ाया हौसला कार्यक्रम में ग्राम प्रधान भानमती, राजेंद्र प्रसाद, चंद्रावती देवी, रमेश कुमार, अब्दुल हकीम, राधिका देवी, रामतौल, पंकज कुमार, सीमा यादव, जाकिया तबस्सुम और रितेश कुमार यादव को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि इन पंचायतों में टीबी मरीजों की पहचान, जांच, इलाज और जागरूकता के काम में प्रधानों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। आगे भी अभियान में सहयोग का भरोसा सम्मानित होने वाले ग्राम प्रधानों ने टीबी उन्मूलन अभियान में आगे भी स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करने का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने कहा कि किसी पंचायत को टीबी मुक्त घोषित किए जाने के बाद भी जागरूकता और सतर्कता जरूरी है। ग्रामीणों को टीबी के लक्षणों के प्रति जागरूक करने और संदिग्ध मरीजों को समय पर जांच व उपचार से जोड़ने का काम लगातार जारी रखा जाएगा।



























