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बलरामपुर के चिरौंजीपुर गांव में 80 साल से बिजली नहीं:ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर; किया प्रदर्शन

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बलरामपुर के हर्रैया सतघरवा विकास खंड के टेढीप्रास ग्राम पंचायत के राजस्व गांव चिरौंजीपुर के ग्रामीण आज भी बिजली का इंतजार कर रहे हैं। आजादी के 80 साल बाद भी यह गांव अंधेरे में डूबा है। ग्रामीणों ने बताया कि साल 2005 से पहले गांव में बिजली के पोल लगाए गए थे और तार भी खींचे गए थे। कुछ समय बाद गांव के पूरब में स्थित खैरहनिया खरझार पहाड़ी नाले में बाढ़ आने से दोनों तरफ के बिजली के पोल गिर गए। इसके बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने इस गांव की सुध नहीं ली। बिजली न होने का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शाम होते ही गांव में घना अंधेरा छा जाता है, जिससे बच्चों को पढ़ने में दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि दूसरे गांवों के बच्चे बिजली की रोशनी में पढ़ते हैं, जबकि उनके बच्चे आज भी अंधेरे और कम संसाधनों के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। शादी में दहेज में मिले बिजली के उपकरण जैसे फ्रिज, कूलर और पंखे भी घरों में रखे-रखे खराब हो जाते हैं। ग्रामीणों ने गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल, डीएम, सांसद और विधायक को कई बार आवेदन दिए हैं। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में बिजली पहुंचाई जाए, ताकि वर्षों से अंधेरे में जी रहे लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। मालिक राम, कलीम, संजय अब्बास, तालुकदार, छोटेलाल, सलमान, बाबादीन, छेदीराम, मोहम्मद रजा, अर्जुन प्रसाद, श्रवण कुमार, सिपाहीलाल, श्याम नरायन, रवि हनीफ, विपिन, राजेश, विजय और लवकुश जैसे ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताई। इन ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव में पीढ़ियों से लोग बिजली का इंतजार कर रहे हैं। उनके पूर्वज भी इस उम्मीद के साथ दुनिया से चले गए कि शायद कभी गांव में रोशनी आएगी। ग्रामीणों के लिए बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि बेहतर जिंदगी का सपना है। वर्षों से अंधेरे में रह रहे ये ग्रामीण अब भी उम्मीद कर रहे हैं कि उनका इंतजार खत्म होगा और उनके गांव में भी पहली बार रोशनी की किरण पहुंचेगी।

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