रेहरा गांव की मुख्य सड़कें आज भी बदहाल हैं। आजादी के इतने साल बाद भी ये सड़कें विकास से कोसों दूर हैं। कागजों में ग्राम पंचायत में विकास के कई दावे किए जाते हैं, लेकिन रेहरा गांव की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। गर्मी, सर्दी या बरसात, किसी भी मौसम में इन सड़कों पर चलना ग्रामीणों के लिए मुश्किल होता है। सड़कों पर जगह-जगह 1 से 2 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी भरने से घुटने तक कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे लोगों को आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है। इस बदहाली का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे कीचड़ भरी सड़क पर गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो एम्बुलेंस अंदर तक नहीं आ पाती। कई बार मरीजों को चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। इससे अस्पताल पहुंचने में काफी देर हो जाती है। ग्रामीणों ने एक साथ कहा कि ‘हमारा गांव विकास का हकदार है, अच्छी सड़कें हमारी जरूरत हैं, भीख नहीं।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘हम लोग टैक्स देते हैं, वोट देते हैं, फिर भी हमारे गांव की सड़कें आज भी कच्ची और बदहाल हैं।’ ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और ब्लॉक अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्हें सिर्फ आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। ग्राम पंचायत रेहरा के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर और खंड विकास अधिकारी बांसी से मांग की है। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द ग्राम पंचायत रेहरा की मुख्य सड़कों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए। साथ ही उनके निर्माण और मरम्मत का काम कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को इस खराब स्थिति से राहत मिल सके।
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