गिलौला इलाके में पिछले करीब 20 से 25 दिनों से बारिश नहीं हुई है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। खेतों में धान की फसल में अब बालियां निकलने लगी हैं, लेकिन पर्याप्त नमी न मिलने से कई खेतों में फसल सूखने लगी है। धान की फसल बचाने के लिए बड़े किसान डीजल इंजन और अपने साधनों से सिंचाई कर रहे हैं। वहीं, छोटे और सीमांत किसानों के सामने फसल बचाने के लिए कर्ज लेने की मजबूरी है। किसानों का कहना है कि धान की फसल इस समय बहुत अहम समय में है। खेतों को पानी की जरूरत है, लेकिन लंबे समय से बारिश न होने के कारण खेतों की नमी लगातार कम होती जा रही है। इससे धान के पौधे मुरझाने लगे हैं और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। किसान बुधु, दलजीत, सुभाष और छोटकउ ने बताया कि धान में अब बालियां आने लगी हैं। ऐसे समय पर फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिला तो उनकी पूरी मेहनत बेकार हो सकती है। किसानों ने यह भी बताया कि बड़े किसान तो डीजल इंजन चलाकर किसी तरह फसल की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन छोटे किसानों के पास सिंचाई के पूरे साधन नहीं हैं। उन्हें फसल बचाने के लिए कर्ज लेकर डीजल और सिंचाई का खर्च उठाना होगा। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार करने में करीब छह महीने तक मेहनत और पैसा लगता है। यदि समय पर खेतों में पानी नहीं पहुंचा तो फसल सूख सकती है और किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। किसानों ने प्रशासन से इलाके में सिंचाई की व्यवस्था करने और नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि सूखे से धान की फसल को बचाया जा सके।
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