सिद्धार्थनगर जिले के इटवा बीआरसी में शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी) प्रशिक्षण का पांचवां बैच सोमवार से शुरू हो गया। प्राथमिक विद्यालय गनवरिया पूरब में आयोजित प्रशिक्षण के पहले दिन शिक्षकों को एनसीईआरटी की पाठ्य-पुस्तकों के आधार पर बुनियादी शिक्षा, भाषा विकास और संख्या ज्ञान की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों, उसके विस्तार और कक्षा के अनुरूप बच्चों को दक्ष बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। संदर्भदाताओं ने शिक्षकों से प्रशिक्षण में सीखे गए क्रियाकलापों को विद्यालयों में बच्चों की शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने का आग्रह किया। पहले सत्र में प्रतिभागियों का हुआ परिचय प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में संदर्भदाता अभिषेक शुक्ला और हेमंत गुप्ता ने प्रतिभागी शिक्षकों का परिचय प्राप्त किया। इसके बाद निपुण भारत मिशन की संकल्पना और उसके विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रशिक्षकों ने बताया कि एफएलएन प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को मजबूत कर निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करना है। बाल वाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित हुआ निपुण लक्ष्य संदर्भदाता हेमंत गुप्ता ने बताया कि निपुण लक्ष्य को बाल वाटिका से कक्षा पांच तक विस्तारित किया गया है। इसका उद्देश्य शुरुआती कक्षाओं से ही बच्चों की बुनियादी शैक्षिक क्षमता को मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत बाल वाटिका से कक्षा पांच तक के सभी विद्यार्थियों को हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन विषयों में उनकी कक्षा के अनुरूप दक्षताओं में निपुण बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रभावी अधिगम प्रक्रिया पर दिया गया जोर प्रशिक्षण में केवल विषयगत ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय बच्चों की अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। संदर्भदाताओं ने शिक्षकों को बताया कि किस प्रकार गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की भाषा और संख्या संबंधी समझ को बेहतर बनाया जा सकता है। प्रशिक्षकों ने कहा कि बच्चों की उम्र और कक्षा के स्तर के अनुसार शिक्षण गतिविधियों का चयन कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक रुचिकर और प्रभावी बनाया जा सकता है। ‘वीना’ का दिया गया परिचय बाद के सत्रों में प्रतिभागियों को ‘वीना’ का परिचय कराया गया। साथ ही उत्तर प्रदेश के संदर्भ में पाठ्यक्रम में किए गए कुछ बदलावों की भी जानकारी दी गई। इस दौरान शिक्षकों को बदलते पाठ्यक्रम और उसके अनुरूप कक्षा शिक्षण की रणनीति अपनाने पर चर्चा की गई, ताकि विद्यार्थियों को निर्धारित दक्षताओं तक पहुंचाने में आसानी हो सके। निपुण भारत के लक्ष्यों पर हुई विस्तृत चर्चा संदर्भदाता लोकेंद्र प्रताप सिंह, संगीत शुक्ला, अभिषेक शुक्ला और डी.पी. सिंह ने निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों और निपुण लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जरूरी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि प्रशिक्षण के दौरान बताए गए क्रियाकलापों और शिक्षण विधियों को विद्यालय पहुंचकर बच्चों के साथ नियमित शिक्षण प्रक्रिया में शामिल करें। कई शिक्षक प्रशिक्षण में रहे मौजूद प्रशिक्षण में प्रेमचंद वर्मा, तारकेश्वर दुबे, मो. सलीम, राघवेंद्र प्रताप सिंह, वंदना मिश्रा, बिंदु भारती, राधिका, निसार अहमद, सुनील यादव, रंजना मिश्रा, उपेंद्र मिश्रा, महेश चंद्र, रेखा यादव, शशि सिंह, मंजू लता चौधरी और ओंकार श्रीवास्तव सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।
शिक्षकों का पांच दिवसीय FLN प्रशिक्षण शुरू:सिद्धार्थनगर में बाल वाटिका से कक्षा 5 तक निपुण बनाने पर फोकस
सिद्धार्थनगर जिले के इटवा बीआरसी में शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी) प्रशिक्षण का पांचवां बैच सोमवार से शुरू हो गया। प्राथमिक विद्यालय गनवरिया पूरब में आयोजित प्रशिक्षण के पहले दिन शिक्षकों को एनसीईआरटी की पाठ्य-पुस्तकों के आधार पर बुनियादी शिक्षा, भाषा विकास और संख्या ज्ञान की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों, उसके विस्तार और कक्षा के अनुरूप बच्चों को दक्ष बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। संदर्भदाताओं ने शिक्षकों से प्रशिक्षण में सीखे गए क्रियाकलापों को विद्यालयों में बच्चों की शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने का आग्रह किया। पहले सत्र में प्रतिभागियों का हुआ परिचय प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में संदर्भदाता अभिषेक शुक्ला और हेमंत गुप्ता ने प्रतिभागी शिक्षकों का परिचय प्राप्त किया। इसके बाद निपुण भारत मिशन की संकल्पना और उसके विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रशिक्षकों ने बताया कि एफएलएन प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को मजबूत कर निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करना है। बाल वाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित हुआ निपुण लक्ष्य संदर्भदाता हेमंत गुप्ता ने बताया कि निपुण लक्ष्य को बाल वाटिका से कक्षा पांच तक विस्तारित किया गया है। इसका उद्देश्य शुरुआती कक्षाओं से ही बच्चों की बुनियादी शैक्षिक क्षमता को मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत बाल वाटिका से कक्षा पांच तक के सभी विद्यार्थियों को हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन विषयों में उनकी कक्षा के अनुरूप दक्षताओं में निपुण बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रभावी अधिगम प्रक्रिया पर दिया गया जोर प्रशिक्षण में केवल विषयगत ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय बच्चों की अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। संदर्भदाताओं ने शिक्षकों को बताया कि किस प्रकार गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की भाषा और संख्या संबंधी समझ को बेहतर बनाया जा सकता है। प्रशिक्षकों ने कहा कि बच्चों की उम्र और कक्षा के स्तर के अनुसार शिक्षण गतिविधियों का चयन कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक रुचिकर और प्रभावी बनाया जा सकता है। ‘वीना’ का दिया गया परिचय बाद के सत्रों में प्रतिभागियों को ‘वीना’ का परिचय कराया गया। साथ ही उत्तर प्रदेश के संदर्भ में पाठ्यक्रम में किए गए कुछ बदलावों की भी जानकारी दी गई। इस दौरान शिक्षकों को बदलते पाठ्यक्रम और उसके अनुरूप कक्षा शिक्षण की रणनीति अपनाने पर चर्चा की गई, ताकि विद्यार्थियों को निर्धारित दक्षताओं तक पहुंचाने में आसानी हो सके। निपुण भारत के लक्ष्यों पर हुई विस्तृत चर्चा संदर्भदाता लोकेंद्र प्रताप सिंह, संगीत शुक्ला, अभिषेक शुक्ला और डी.पी. सिंह ने निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों और निपुण लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जरूरी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि प्रशिक्षण के दौरान बताए गए क्रियाकलापों और शिक्षण विधियों को विद्यालय पहुंचकर बच्चों के साथ नियमित शिक्षण प्रक्रिया में शामिल करें। कई शिक्षक प्रशिक्षण में रहे मौजूद प्रशिक्षण में प्रेमचंद वर्मा, तारकेश्वर दुबे, मो. सलीम, राघवेंद्र प्रताप सिंह, वंदना मिश्रा, बिंदु भारती, राधिका, निसार अहमद, सुनील यादव, रंजना मिश्रा, उपेंद्र मिश्रा, महेश चंद्र, रेखा यादव, शशि सिंह, मंजू लता चौधरी और ओंकार श्रीवास्तव सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।



























