भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को जारी करने की अनुमति दे दी है। करीब 21 साल से अटका हुआ यह नया मास्टर प्लान शहर के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि अंतिम मास्टर प्लान जारी करने से पहले अदालत को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी और न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद ही इसे फाइनल किया जाएगा।
सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
न्यायालय ने सीलिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। सील किए गए प्रतिष्ठानों के सुबह बंद रहने और शाम को दोबारा खुलने की शिकायतों पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान रहवासियों की ओर से ऐसी 9 शिकायतें पेश की गईं, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को सीलिंग की कार्रवाई और अधिक प्रभावी ढंग से जारी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।
पुरानी समिति भंग, नगर निगम को अधिकार
मामले की सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई समिति पर भी चर्चा हुई। अदालत ने समिति के कामकाज पर असंतोष जताते हुए पहले से गठित समिति को भंग कर दिया है। अब नगर निगम को अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से नियमानुसार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
दो दशक से लागू है पुराना प्लान
राजधानी भोपाल में वर्तमान में वर्ष 2005 के पुराने मास्टर प्लान के आधार पर ही विकास और निर्माण गतिविधियां संचालित हो रही हैं। पिछले दो दशकों से नए मास्टर प्लान को अंतिम रूप नहीं मिल पाया था, जिसके कारण शहर में व्यावसायिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों को लेकर कई असमंजस की स्थितियां बनी हुई थीं। अब नए ड्राफ्ट के प्रकाशन की अनुमति मिलने से राजधानी के शहरी विकास को एक नई गति मिलने की उम्मीद है।














































