PM Awas Yojana Gramin List 2026: हर कुछ महीने में इंटरनेट पर “PM आवास ग्रामीण नई लिस्ट जारी” जैसे शीर्षक घूमने लगते हैं। पढ़ने वाला मान लेता है कि कोई एक देशव्यापी सूची निकली है, जिसमें नाम ढूंढना है। पर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) में ऐसी कोई एक सूची नहीं है। सूची राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत के हिसाब से बनती है, और उसके बनने के कई चरण हैं।
इस वक्त योजना का दूसरा दौर चल रहा है, जिसे केंद्र सरकार ने 2024-25 से 2028-29 तक के लिए मंजूर किया है। इसमें 2 करोड़ अतिरिक्त घर बनाने का लक्ष्य है। इन घरों के लिए लाभार्थी चुनने का काम Awaas+ 2024 सर्वे से हो रहा है। इसलिए आपके नाम का सवाल असल में यह है कि आपका सर्वे कहां तक पहुंचा।
नीचे वही बातें हैं जो सरकारी स्रोतों में दर्ज हैं, और जहां कोई दावा अपुष्ट है वहां वही लिखा है। जानकारी 1 अक्टूबर 2026 तक की है।
सीधा जवाब
कोई एक राष्ट्रीय “नई लिस्ट 2026” मुझे आधिकारिक रूप से नहीं मिली। अपना नाम PMAY-G पोर्टल (pmayg.nic.in) पर राज्य, जिला, ब्लॉक और पंचायत चुनकर देखें। नाम न मिले तो अपनी ग्राम पंचायत में पूछें कि आपका Awaas+ सर्वे किस हाल में है। सूची में नाम होना और बैंक खाते में पैसा आना दो अलग पड़ाव हैं।
“लिस्ट” बनती कैसे है
PIB के अनुसार लाभार्थी की पहचान तीन चरणों की जांच से होती है: SECC 2011 या Awaas+ सर्वे के आंकड़े, फिर ग्राम सभा की मंजूरी, फिर जियो-टैगिंग। पुरानी SECC 2011 वाली स्थायी प्रतीक्षा सूची अब भर चुकी है, और 20 से ज्यादा राज्यों की Awaas+ 2018 सूचियां भी पूरी हो चुकी हैं।
नए दौर के लिए Awaas+ 2024 मोबाइल ऐप 17 सितंबर 2024 को शुरू हुआ। इसमें खुद सर्वे करने (सेल्फ सर्वे) की सुविधा भी है और पहले से पंजीकृत सर्वेयर से कराने की भी। ऐप में आधार से चेहरे की पहचान, मौजूदा घर की जियो-टैग फोटो और घर बनाने की जगह की फोटो ली जाती है। यानी जिस परिवार का सर्वे हुआ, उसका नाम पंचायत की सूची में तब आता है जब ग्राम सभा उसे सत्यापित कर दे।
इसके बाद एक और बाधा है। राज्य को केंद्र से घरों का लक्ष्य मिलना चाहिए, तभी स्वीकृतियां शुरू होती हैं। इसीलिए अलग-अलग राज्यों में हाल बहुत अलग है। एक उदाहरण: ओडिशा पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार वहां सर्वे पूरा हो चुका है और स्थायी प्रतीक्षा सूची बन रही है। 22 सितंबर 2026 को रिपोर्ट हुए एक मंत्री-उत्तर के हवाले से वहां 2025-26 और 2026-27 में अब तक कोई घर स्वीकृत नहीं हुआ बताया गया। यह एक राज्य और एक गैर-सरकारी रिपोर्ट का उदाहरण है, इसे पूरे देश पर लागू न मानें। पर इससे यह जरूर दिखता है कि “सर्वे हो गया” और “घर स्वीकृत हो गया” में फासला हो सकता है।
देश भर की प्रगति कहां तक पहुंची
31 मार्च 2026 के सरकारी बयान के अनुसार पहले और दूसरे चरण मिलाकर 4.15 करोड़ घरों का लक्ष्य राज्यों को दिया गया, जिनमें 3.90 करोड़ स्वीकृत और 2.99 करोड़ पूरे हो चुके थे। योजना का कुल लक्ष्य 2029 तक 4.95 करोड़ घर है। इसके बाद के आंकड़े और ऊपर गए हैं, पर आपके रेफरेंस में दी गई अगस्त 2026 की संख्याएं और “नए चरण के 97.48 लाख घर स्वीकृत” वाली बात मैं किसी सरकारी स्रोत में नहीं खोल सका, इसलिए उन्हें यहां नहीं लिया।
किसे मिल सकता है, किसे नहीं
PIB की विज्ञप्ति के अनुसार पात्र वे ग्रामीण परिवार हैं जिनके पास कोई आश्रय नहीं है, या जो कच्ची दीवार और कच्ची छत वाले मकान में रहते हैं। कुछ श्रेणियां सीधे शामिल मानी जाती हैं: बेसहारा या भीख पर निर्भर परिवार, मैला ढोने वाले, आदिम जनजाति समूह और बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए लोग।
सूची में प्राथमिकता उनको मिलती है जो बेघर हैं या जिनके घर में सबसे कम कमरे हैं। इसके ऊपर वंचना के आधार पर भी अंक जुड़ते हैं, जैसे ऐसा परिवार जिसमें 16 से 59 साल का कोई वयस्क न हो, जिसकी मुखिया महिला हो और कोई वयस्क पुरुष न हो, जिसमें 25 साल से ऊपर कोई साक्षर न हो, या जिसमें दिव्यांग सदस्य हो और कोई सक्षम वयस्क न हो।
अब वे जिन्हें बाहर रखा जाता है। PIB की सूची में ये शामिल हैं:
- ₹50,000 या उससे ज्यादा की सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड रखने वाले परिवार
- सरकारी कर्मचारी वाले परिवार, या गैर-कृषि कारोबार वाले
- जिनकी मासिक आय ₹15,000 से ज्यादा है या जो आयकर देते हैं
- फ्रिज या लैंडलाइन फोन वाले, या ढाई एकड़ से ज्यादा सिंचित जमीन वाले
पुराने नियमों की तुलना में यह थोड़ी नरम है। बहिष्करण की शर्तें 13 से घटाकर 10 की गई हैं, मछली पकड़ने की नाव या मोटर वाला दोपहिया रखने पर अब परिवार बाहर नहीं होता, और आय की सीमा बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह की गई है। यह भी ध्यान रहे कि PIB की सूची में फ्रिज और लैंडलाइन अब भी लिखे हैं, जबकि सर्वे ऐप की अंतिम शर्तें इससे अलग दिख सकती हैं। इसलिए सर्वेयर या ब्लॉक कार्यालय से अपने मामले की शर्तें पूछ लें।
लक्ष्य में भी आरक्षण है: कम से कम 60% SC/ST परिवारों के लिए, 5% दिव्यांगों के लिए, 5% प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए, और राष्ट्रीय स्तर पर 15% धन अल्पसंख्यक परिवारों के लिए।
पैसा और बाकी सुविधाएं
PIB के अनुसार मैदानी इलाकों में ₹1.20 लाख और पूर्वोत्तर, हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में ₹1.30 लाख प्रति घर मिलते हैं। यह राशि पिछले दौर से वही है। कभी-कभी रकम बढ़ाकर ₹1.8 लाख और ₹2 लाख किए जाने की खबरें मीडिया में आती रही हैं, पर मुझे ऐसा कोई आधिकारिक फैसला नहीं मिला।
इसके अलावा विज्ञप्ति में ये चीजें गिनाई गई हैं:
- शौचालय के लिए स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण से ₹12,000 तक
- मनरेगा से 95 दिन की मजदूरी, ₹90.95 रोजाना के हिसाब से
- घर के लिए मुफ्त उज्ज्वला एलपीजी कनेक्शन, पानी और बिजली कनेक्शन
- ₹70,000 तक का कर्ज, 3% कम ब्याज पर
- घर का न्यूनतम आकार 25 वर्ग मीटर, जिसमें रसोई की अलग जगह हो
घर आप खुद बनवाते हैं, स्थानीय सामग्री और प्रशिक्षित राजमिस्त्री से, और पैसा आधार से जुड़े बैंक या डाकघर खाते में सीधे जाता है। इसी वजह से खाते का आधार से जुड़ा होना जरूरी है। हर राज्य में किस्तों की संख्या और रकम का बंटवारा निर्माण के चरण से तय होता है, इसलिए कोई एक तारीख या रकम सब पर लागू नहीं होती।
पोर्टल पर अपना नाम कैसे देखें
पोर्टल का ले-आउट बदलता रहता है, इसलिए नीचे के नाम मोटे तौर पर समझिए, हूबहू नहीं।
- pmayg.nic.in खोलें। यही वह पता है जो PIB की विज्ञप्ति के संदर्भों में दिया गया है।
- “Stakeholders” में लाभार्थी वाला विकल्प (IAY/PMAY-G Beneficiary) चुनें और अगर आपके पास रजिस्ट्रेशन नंबर है तो उसे डालें।
- नंबर न हो तो रिपोर्ट वाले हिस्से से राज्य, जिला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत और गांव चुनकर अपनी पंचायत की सूची खोलें।
- उसमें नाम, पिता या पति का नाम और स्वीकृति की स्थिति मिलाएं।
पोर्टल न खुले या सूची खाली दिखे तो ग्राम पंचायत, पंचायत सचिव या आवास सहायक से सीधे पूछना सबसे तेज़ रास्ता है।
नाम न मिले तो
सबसे पहले यह पता करें कि आपका सर्वे हुआ भी था या नहीं। सर्वे हुआ हो तो पंचायत से पूछें कि वह ग्राम सभा के सत्यापन में कहां अटका है। सर्वे ही न हुआ हो तो पूछें कि आपके राज्य में Awaas+ 2024 का सर्वे फिर से खुला है या नहीं। सर्वे की तारीखें राज्य के हिसाब से अलग रही हैं, और मैंने आपके लिए कोई एक अंतिम तारीख नहीं पाई।
एक और बात, जो अक्सर छूट जाती है। जब कोई कहता है कि वह पैसे लेकर सूची में नाम जुड़वा देगा या आवास पास करा देगा, तो वह आपकी मदद नहीं कर रहा। नाम सर्वे और ग्राम सभा से तय होता है, किसी एजेंट से नहीं।
आम गलतियां
- किसी वेबसाइट की “नई लिस्ट PDF” को अंतिम मान लेना।
- सर्वे करवाकर पंचायत में पता न करना कि उसका सत्यापन हुआ या नहीं।
- आधार से जुड़ा बैंक खाता तैयार न रखना, खासकर जब स्वीकृति आए।
- बिना स्वीकृति के पक्का निर्माण शुरू कर देना और बाद में पैसे की उम्मीद रखना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या PMAY-G की कोई नई राष्ट्रीय लिस्ट जारी हुई है?
ऐसी कोई एक सूची मुझे आधिकारिक रूप से नहीं मिली। सूची राज्य और पंचायत स्तर पर बनती है।
योजना कब तक चलेगी?
केंद्र सरकार ने 2024-25 से 2028-29 तक के लिए मंजूरी दी है, जिसमें 2 करोड़ अतिरिक्त घर शामिल हैं।
कितनी रकम मिलती है?
मैदानी इलाकों में ₹1.20 लाख और पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में ₹1.30 लाख, पूर्वोक्त सुविधाओं के साथ।
क्या मासिक आय की कोई सीमा है?
PIB के अनुसार ₹15,000 प्रति माह से ज्यादा आय या आयकर देने वाले परिवार बाहर रहते हैं।
क्या खुद ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं?
PIB की विज्ञप्ति UMANG पर ऑनलाइन पंजीकरण का लिंक देती है। पर लाभार्थी की पहचान Awaas+ सर्वे और ग्राम सभा से होती है, इसलिए पंचायत से सर्वे की स्थिति जरूर पूछ लें।
पैसा कब आएगा?
किसी एक तारीख की घोषणा नहीं है। यह स्वीकृति, जियो-टैगिंग और निर्माण के चरण पर निर्भर करता है।
क्या नाम जुड़वाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं?
नहीं। सरकारी प्रक्रिया में ऐसा कोई शुल्क नहीं है।
PMAY-G की मंजूरी 2028-29 तक है और पूरा ढांचा सर्वे, ग्राम सभा और राज्यों को मिलने वाले लक्ष्य पर टिका है। इसलिए “लिस्ट कब आएगी” से ज्यादा काम का सवाल यह है कि आपका सर्वे कहां है। अपनी पंचायत से यही पूछिए, और जो भी वादा करे कि पैसे लेकर काम करा देगा, उससे दूर रहिए।
उपयोग किए गए स्रोत (जांच की तारीख: 1 अक्टूबर 2026)
आधिकारिक स्रोत:
- PIB, “Pradhan Mantri Awas Yojana – Rural” (19 नवंबर 2024): https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2074713®=48&lang=2
- PIB, “Self-Surveys under Pradhan Mantri Awaas Yojana-Gramin” (10 दिसंबर 2024): https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2082688®=48&lang=2
- आकाशवाणी, राज्यसभा उत्तर पर रिपोर्ट (6 फरवरी 2026): https://www.newsonair.gov.in/govt-sanctions-over-3-crore-87-lakh-houses-to-states-union-territories-under-pmay-g
- DD News, ग्रामीण विकास मंत्रालय की वर्षांत समीक्षा (Awaas+ 2024 ऐप की सुविधाएं): https://ddnews.gov.in/en/year-ender-govt-aims-to-build-2-crore-houses-under-pms-scheme-for-rural-poor/
- PMAY-G पोर्टल: https://pmayg.nic.in (यह मेरे टूल से नहीं खुला)
अन्य स्रोत (गैर-सरकारी):
- IANS की रिपोर्ट, 31 मार्च 2026 का सरकारी बयान: https://www.newsgram.com/business/2026/03/31/nearly-3-crore-rural-homes-completed-under-pmayg-centre
- Subhadra Yojana, ओडिशा में PMAY-G की स्थिति (सितंबर 2026): https://subhadra-yojanain.com/pm-awas-yojana-gramin-odisha/
डिस्क्लेमर
यह एक सूचनात्मक लेख है और हमारा किसी सरकारी विभाग या ग्रामीण विकास मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है। जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और सरकारी विज्ञप्तियों पर आधारित है (1 अक्टूबर 2026 तक), और नियम या प्रक्रिया बदल सकती है। आवेदन, सर्वे या लाभ से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले अपनी ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय या आधिकारिक पोर्टल से पुष्टि करें। हम लाभ की कोई गारंटी नहीं देते। किसी अनजान व्यक्ति को आधार, बैंक डिटेल या OTP न दें, और नाम जुड़वाने के नाम पर पैसे न दें।












































