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75 की उम्र में भी नदी बचाने का जुनून:भोधार निषाद खुद मनोरमा में उतरे, 50 ग्रामीणों ने एक दिन में 500 मीटर जलकुंभी हटाई

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बस्ती के कप्तानगंज ब्लॉक में 75 साल के भोधार निषाद इन दिनों मनोरमा नदी को बचाने की मुहिम में ग्रामीणों के लिए मिसाल बने हुए हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह युवाओं से कम नहीं है। वे खुद नदी में उतरकर जलकुंभी हटाने की मुहिम की अगुवाई कर रहे हैं। साथ ही युवाओं के साथ बुजुर्गों को भी नदी की सफाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पांच किलोमीटर नदी साफ करने का संकल्प
ग्रामीणों ने सडवलिया घाट स्थित स्वर्णेश्वर महादेव मंदिर से मेढौवा तक करीब पांच किलोमीटर मनोरमा नदी को साफ करने का फैसला किया है। इसी अभियान के तहत गुरुवार को करीब 50 ग्रामीण नदी में उतरे। किसी ने सरकारी मदद का इंतजार नहीं किया और न ही सफाई के लिए पैसों की मांग की। ग्रामीणों ने मिलकर नदी की जलकुंभी हटाने का काम शुरू किया। नाव से बीच बहाव तक पहुंचकर काटी जलकुंभी
सफाई अभियान के दौरान ग्रामीण नाव के जरिए नदी के बीच बहाव तक पहुंचे। वहां जलकुंभी काटी गई, जबकि किनारे मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकाला। सामूहिक प्रयास का असर यह रहा कि एक दिन में करीब 500 मीटर नदी के बहाव से जलकुंभी हटाई गई। ग्रामीणों का लक्ष्य धीरे-धीरे पांच किलोमीटर के हिस्से को साफ करना है। बोले भोधार- नदी हमारी जिंदगी और पहचान है
भोधार निषाद ने कहा, “यह नदी हमारे लिए सिर्फ पानी का बहाव नहीं, हमारी जिंदगी और हमारी पहचान है। इसी नदी के किनारे हमारी पीढ़ियां पली-बढ़ी हैं। अगर हम इसे नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।” सफाई के दौरान उनका जोश देखते ही बन रहा था। कभी वे नाव लेकर नदी के बहाव में पहुंचते तो कभी किनारे खड़े लोगों को जलकुंभी हटाने के लिए प्रेरित करते। महंत गिरजेश दास भी नदी में उतरे
ग्रामीणों की इस मुहिम को धर्मगुरुओं का भी समर्थन मिला। पोखरा पीठाधीश्वर महंत गिरजेश दास जी महाराज ग्रामीणों के साथ नदी में उतरे और सफाई अभियान में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि मनोरमा नदी सिर्फ जलधारा नहीं है, बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और पहचान से जुड़ी हुई है। इसे स्वच्छ और जीवंत बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। सरकारी योजना का इंतजार किए बिना शुरू हुई मुहिम
ग्रामीणों का कहना है कि मनोरमा नदी की सफाई के लिए यह अभियान किसी सरकारी योजना का इंतजार किए बिना शुरू किया गया है। ग्रामीण अपने स्तर पर श्रमदान कर नदी से जलकुंभी निकाल रहे हैं। उनका कहना है कि भोधार निषाद जैसे बुजुर्ग का नेतृत्व युवाओं में भी नदी को बचाने का उत्साह बढ़ा रहा है। अभियान के जरिए ग्रामीण मनोरमा नदी के पुराने स्वरूप और साफ बहाव को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।