BREAKING
खबरें लोड हो रही हैं...
Home उत्तर प्रदेश संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन:महराजगंज में आरक्षण आर्थिक आधार...

संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन:महराजगंज में आरक्षण आर्थिक आधार पर लागू करने समेत 4 मांगें

0
1

महराजगंज में संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है। यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया। इसमें जनहित और राष्ट्रीय हित से जुड़ी चार प्रमुख मांगें उठाई गई हैं। इनमें यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 वापस लेना, आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करना और एससी-एसटी एक्ट की जगह एक समान कानून बनाना शामिल है। मोर्चा ने ज्ञापन में कहा कि यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 से समाज में जातीय भेदभाव बढ़ा है। उच्च शिक्षण संस्थानों में बेवजह के विवाद बढ़ रहे हैं। इससे शिक्षा और अवसरों में असमानता बढ़ रही है, जिससे योग्य छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। मोर्चा ने इस एक्ट को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे छात्रों में प्रेम और भाईचारे की भावना बढ़ेगी। 1993 के नियम में सुधार मांगा मोर्चा ने आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इसका फायदा सिर्फ असली जरूरतमंदों को मिलना चाहिए। ज्ञापन में ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर तय करने के लिए डीओपीटी के 1993 के नियम में सुधार मांगा गया। मोर्चा ने बताया कि अभी 8 लाख रुपये सालाना आय वाला छोटा दुकानदार या व्यापारी क्रीमी लेयर में आता है। इससे कम आय वाले परिवारों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। इसमें ओबीसी के साथ एससी-एसटी में भी क्रीमी लेयर की साफ सीमा लागू करने की मांग की गई है। सख्त कार्रवाई की मांग की इसके अलावा, एससी-एसटी एक्ट के कथित गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई गई। मोर्चा ने इसकी जगह सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग संरक्षण एक्ट 2026 लागू करने की मांग की है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक नारों और धार्मिक भावनाएं भड़काने वाली गतिविधियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई। राजनीतिक स्थिति का आकलन मोर्चा ने देश में सामान्य वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का आकलन करने की मांग की। उनके हितों की रक्षा के लिए सामान्य वर्ग आयोग बनाने की भी मांग रखी गई। मोर्चा ने राष्ट्रपति से सभी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। ज्ञापन पर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के दस्तखत हैं।