मनोरमा नदी को बचाने के लिए अब किसी एक व्यक्ति के आंदोलन की नहीं, बल्कि पूरे समाज के संकल्प की जरूरत है। नदी की धारा और उसकी पवित्रता को बचाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। यह संकल्प राजनीति, जाति, दल और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर लेना होगा। समाज को यह तय करना होगा कि मनोरमा नदी की धारा, उसकी पवित्रता और उसकी सांस्कृतिक पहचान बची रहे। नदियां जब सूखती हैं या प्रदूषित होती हैं, तो केवल पानी ही गंदा नहीं होता, बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में आ जाती है। मनोरमा नदी को बचाना सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी का कर्तव्य है। समाज को यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाली पीढ़ियां यह कह सकें कि जब मनोरमा नदी संकट में थी, तब लोगों ने केवल चिंता नहीं की, बल्कि उसे बचाने के लिए आगे आए थे। सभी को मिलकर ‘मां मनोरमा’ की पवित्रता लौटाने, उसकी धारा बचाने और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित सौंपने का संकल्प लेना चाहिए।
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