महराजगंज के बोकड़ा देवी स्थान के पास सुइया नाले में डूबने से पूनम देवी (48) और उनके दो बच्चों विपिन (8) व सुहानी (6) की मौत हो गई। पूनम बच्चों के साथ अपने ससुराल जा रही थीं। उनका ससुराल नर्सरी बीट में जंगल के बीच है। रास्ते में पड़ने वाला सुइया नाला बारिश के मौसम में पानी से भर जाता है और आमतौर पर लोग नाव से इसे पार करते हैं। परिजनों के मुताबिक, 15 तारीख को नाले में नाव उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में पूनम ने दोनों बच्चों के साथ पैदल ही नाला पार करने का फैसला किया। नाले में पानी गहरा था। इसी दौरान पैर फिसलने से तीनों गहरे पानी में चले गए और डूबने से उनकी मौत हो गई। परिजनों ने मंगलवार से तीनों की तलाश शुरू की थी। बुधवार को पूनम देवी और उनके दोनों बच्चों के शव सुइया नाले से बरामद हुए। पुणे से गांव पहुंचे पति, शव देखकर बदहवास हादसे की जानकारी मिलने पर पूनम के पति मोहित पुणे से गांव पहुंचे। वह वहां मजदूरी करते हैं। घर के आंगन में पत्नी और दोनों बच्चों के शव देखकर वह भावुक हो गए। मोहित ने कहा कि वह अपने बच्चों को बेहतर जिंदगी देने के लिए कमाने के लिए बाहर गए थे। पूनम की चार बेटियां हैं। बेटियां भगवानी और पूजा अपने छोटे भाई-बहन को याद कर रही हैं। विपिन परिवार का इकलौता बेटा था। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा है। नाले के पास न बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में नाले का जलस्तर बढ़ने पर नाव चलना बंद हो जाती है। ऐसे में लोगों के पास पैदल रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। नाले के पास पानी की गहराई और सड़क पर बने गड्ढों की जानकारी देने वाला कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था। सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की भी व्यवस्था नहीं की गई थी। समय रहते बैरिकेडिंग होती तो बच सकती थी जान ग्रामीणों का कहना है कि नाले के आसपास बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजाम होते तो लोगों को गहरे पानी में जाने से रोका जा सकता था। आरोप है कि पूनम का पैर गहरे गड्ढे में फिसलने के बाद वह बच्चों समेत पानी में चली गईं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जलभराव और गहरे गड्ढों की समस्या पहले से बनी हुई है। इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। चार बेटियों के सिर से उठा मां का साया पूनम देवी और उनके दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। हादसे के बाद परिवार में चार बेटियां रह गई हैं। मां और छोटे भाई-बहन को खोने के बाद बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद ग्रामीणों ने नाले के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बारिश के दौरान सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है। अब सवाल है कि इस हादसे के बाद प्रशासन नाले के आसपास सुरक्षा के क्या इंतजाम करता है।
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