मार्च में एक सड़क का लोकार्पण कर दिया गया, लेकिन महीनों बाद भी इसका निर्माण शुरू नहीं हो सका है। 85.58 लाख रुपये की लागत से एक किलोमीटर लंबी यह सड़क बननी थी। हालांकि, मौके पर आज भी कच्चा रास्ता ही है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। सालों से खराब इस कच्चे रास्ते के बनने की उम्मीद तब जगी थी, जब मार्च में इसका लोकार्पण कर सड़क किनारे एक शिलापट्ट लगाया गया। ग्रामीणों को लगा था कि अब जल्द ही सड़क बनेगी और आने-जाने की दिक्कतें खत्म होंगी। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि ठेकेदार ने निर्माण कार्य के नाम पर करीब 60 लाख रुपये निकाल लिए हैं। हालांकि, अखबार इस दावे की पुष्टि नहीं करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सड़क के लिए इतनी बड़ी रकम मंजूर है, तो काम शुरू क्यों नहीं हुआ। ग्रामीणों ने विभाग से मंजूर रकम और अब तक हुए भुगतान की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। सलेमपुर पांडेय निवासी जगदीश पांडेय ने बताया कि सड़क बनाए बिना ही इसका लोकार्पण कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि निर्माण के लिए मंजूर रकम कहां गई, यह पता लगाना मुश्किल है। ढेबरहिया निवासी शोभा देवी ने कहा कि सड़क सालों से खराब है। आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है। शिलापट्ट लगने के बाद उम्मीद जगी थी, लेकिन अब लगता है कि उम्मीदें सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह गईं। शिवकुमारी ने कहा कि नेता लोग आए, शिलापट्ट लगाकर चले गए, लेकिन सड़क आज भी वैसी ही खराब है। वहीं, सुशील कुमार ने कहा कि सड़क जमीन पर तो नहीं बन सकी, लेकिन शिलापट्ट लगाकर फाइलों में जरूर बन गई होगी। ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क के बनने की उम्मीद लोकार्पण के साथ जगी थी, वह आज भी कच्ची है। बारिश में कीचड़ और गड्ढों के कारण राहगीरों को परेशानी होती है। लोगों ने संबंधित विभाग से मामले की जांच कर काम की मौजूदा स्थिति बताने की मांग की है।
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