
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण भारत-नेपाल पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले चार दिनों से भारतीय पर्यटक केवल भैरहवा, बुटवल और लुंबिनी तक ही यात्रा कर रहे हैं। नेपाल के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही में भारी कमी आई है। सामान्य दिनों में सोनौली सीमा से प्रतिदिन औसतन 15 से 20 पर्यटक बसें और 45 से 50 वाहन नेपाल के विभिन्न पर्यटन स्थलों, विशेषकर पोखरा और काठमांडू के लिए रवाना होते थे। आपदा के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। शुक्रवार को केवल पांच पर्यटक बसें लुंबिनी पहुंचीं, जबकि लगभग 10 वाहन बुटवल और भैरहवा तक ही गए। नेपाल के प्रमुख मार्गों पर बाढ़ और भूस्खलन के कारण आवागमन बाधित होने से पर्यटक अब लंबी दूरी की यात्रा करने से बच रहे हैं। विशेष रूप से पोखरा और काठमांडू की यात्रा को लेकर पर्यटकों में अनिश्चितता बनी हुई है। कई पर्यटकों ने सड़कों की स्थिति सामान्य होने तक अपनी यात्रा स्थगित कर दी है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि आपदा के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने से भारतीय पर्यटकों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। यदि प्रमुख राजमार्ग जल्द सामान्य नहीं हुए, तो पर्यटन उद्योग को और अधिक नुकसान हो सकता है। भैरहवा भंसार के चीफ हरिहर पौडेल ने पुष्टि की है कि भारतीय पर्यटक वाहनों की संख्या में कमी आई है। व्यापार मंडल अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने बताया कि वर्तमान में नेपाल के पहाड़ी इलाकों में यात्रा करना सुरक्षित नहीं है। इस संबंध में भारतीय पर्यटकों को भी जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे इन क्षेत्रों में जाने से बचें।
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