
मोहनलालगंज, लखनऊ। मां की मौत के बाद डेढ़ साल के मासूम प्रिंस के सिर से अब पिता का साया भी छिन गया।मोहनलालगंज नगर पंचायत के राजाखेड़ा गांव में 13 अगस्त को फर्राटा पंखे में उतरे करंट की चपेट में आकर विवाहिता गीता की मौत हो गई थी।घटना के बाद कराए गए पोस्टमार्टम में भी डाक्टरो ने मौत की वजह करंट लगना बताई थी इसके बावजूद मृतका के पिता की शिकायत पर पति व सास-ससुर के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने सोमवार को पति प्रमोद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस की इस कार्रवाई को ग्रामीण जल्दबाजी में की गई कार्रवाई बताते हुए सवाल खड़े कर रहे हैं।मोहनलालगंज के राजाखेड़ा निवासी प्रमोद कुमार मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। 13 अगस्त की सुबह वह मजदूरी करने गया था। घर में पत्नी गीता और डेढ़ साल का मासूम बेटा प्रिंस मौजूद थे। इसी दौरान फर्राटा पंखे में करंट उतरने से गीता उसकी चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई। दूसरे घर में रहने वाली सास हसना बेटे के घर पहुंची तो बहू के ऊपर फर्राटा पंखा गिरा देख उसके होश उड़ गए। उसने तत्काल बेटे प्रमोद समेत पड़ोसियों को घटना की जानकारी दी।गीता की मौत के बाद परिवार में मातम छा गया। जिस मासूम ने अभी ठीक से मां को पुकारना भी नहीं सीखा था, उससे मां का साया हमेशा के लिए छिन गया। पत्नी की मौत के बाद प्रमोद खुद भी सदमे में था, लेकिन बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी। इसी बीच मृतका के पिता राम अवतार ने बेटी की मौत को लेकर उच्चाधिकारियों से शिकायत की और पति प्रमोद कुमार समेत सास-ससुर के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। पोस्टमार्टम में करंट से मौत की पुष्टि, फिर दहेज हत्या में गिरफ्तारी पर सवाल…ग्रामीणों का कहना है कि जब घटना में करंट लगने की बात सामने आई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण करंट लगना सामने आया, तो दहेज हत्या के मुकदमे में पति की गिरफ्तारी को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मामले की गहराई से जांच किए बिना पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई करते हुए प्रमोद को जेल भेज दिया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि पुलिस निष्पक्ष जांच करती तो घटना से जुड़े सभी पहलुओं को सामने आने का मौका मिलता। उनका सवाल है कि जब पत्नी की मौत के बाद सदमे में चल रहा पति अपने डेढ़ साल के बच्चे का इकलौता सहारा था, तो उसे जेल भेजने से पहले मासूम के भविष्य और परवरिश के बारे में भी सोचा गया या नहीं मां नहीं रही, पिता जेल में है… आखिर डेढ़ साल के मासूम प्रिंस की परवरिश कौन करेगा…ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच के बाद प्रमोद निर्दोष पाया जाता है तो तब तक मासूम अपने पिता से दूर रहकर किस मानसिक पीड़ा से गुजरेगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा किए जाने की मांग की है, ताकि किसी निर्दोष को सजा न मिले और मासूम के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ न हो।फिलहाल गीता की मौत का दुख एक परिवार को तोड़ चुका है, लेकिन उसके बाद हुई कार्रवाई ने एक मासूम की जिंदगी को भी सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ मां की मौत का दर्द, दूसरी तरफ जेल में बंद पिता… और बीच में मासूम प्रिंस, जिसे अभी यह भी नहीं पता कि उसके मां-बाप आखिर उससे दूर क्यों हो गए।
























