श्रावस्ती में 4 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। जिलेभर में कुछ मंदिरों और ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों से लेकर मंदिरों तक सजावट की तैयारियां चल रही हैं। बाजारों में राधा-कृष्ण की आकर्षक पोशाकों, लड्डू गोपाल के झूलों और पूजन सामग्री की दुकाने लग गई है। दुकानों पर लड्डू गोपाल के लिए नई-नई डिजाइन के झूले आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त माखन-मिश्री, विशेष प्रसाद और भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार की सामग्री भी उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की डोलियां सजाने और मंदिरों की साज-सज्जा को लेकर तैयारी में जुटे हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर पुलिस लाइन सहित जिले के विभिन्न थानों में भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिस लाइन में हर वर्ष करीब हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जन्माष्टमी के मध्य रात्रि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण किया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। उस समय कंस के अत्याचार से धरती त्रस्त थी। श्रीकृष्ण का जन्म अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। पंडित सुधाकर शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी की रात रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म माना जाता है। जन्माष्टमी से पहले ही संतों और श्रद्धालुओं के साथ गांवों में भी उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। भगवान की डोलियां सजाई जाती हैं और घरों व मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। पर्व के आते ही लोगों में नई उमंग और उत्साह का माहौल बन जाता है।
श्रावस्ती में 4 सितंबर को जन्माष्टमी:सजने लगे मंदिर और बाजार, श्रद्धालुओं में उत्साह
श्रावस्ती में 4 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। जिलेभर में कुछ मंदिरों और ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों से लेकर मंदिरों तक सजावट की तैयारियां चल रही हैं। बाजारों में राधा-कृष्ण की आकर्षक पोशाकों, लड्डू गोपाल के झूलों और पूजन सामग्री की दुकाने लग गई है। दुकानों पर लड्डू गोपाल के लिए नई-नई डिजाइन के झूले आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त माखन-मिश्री, विशेष प्रसाद और भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार की सामग्री भी उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की डोलियां सजाने और मंदिरों की साज-सज्जा को लेकर तैयारी में जुटे हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर पुलिस लाइन सहित जिले के विभिन्न थानों में भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिस लाइन में हर वर्ष करीब हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जन्माष्टमी के मध्य रात्रि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण किया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। उस समय कंस के अत्याचार से धरती त्रस्त थी। श्रीकृष्ण का जन्म अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। पंडित सुधाकर शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी की रात रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म माना जाता है। जन्माष्टमी से पहले ही संतों और श्रद्धालुओं के साथ गांवों में भी उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। भगवान की डोलियां सजाई जाती हैं और घरों व मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। पर्व के आते ही लोगों में नई उमंग और उत्साह का माहौल बन जाता है।






























