श्रावस्ती। जनपद के हरिहरपुर ब्लॉक क्षेत्र के जोगनी खर्च गांव में राजकीय बालिका हाईस्कूल तक पहुंचने वाला करीब 800 मीटर रास्ता बरसात में बदहाल हो गया है। कीचड़, पानी और फिसलन से भरे इस रास्ते से होकर छात्राओं और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
छात्राओं ने सड़क की हालत को लेकर व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि “हम धन्य हैं कि हमें ऐसा रोड मिला है। हम पैदल स्कूल नहीं जाते, उड़कर जाते हैं। हमारे अध्यापक भी हेलीकॉप्टर से आते होंगे।”
छात्राओं का कहना है कि केंद्र में विकास की सरकार, प्रदेश में विकास की सरकार और जिले में भी विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन उनके विद्यालय तक पहुंचने वाले महज 800 मीटर रास्ते की स्थिति वर्षों से जस की तस बनी हुई है।बताया जा रहा है कि करीब 10 वर्षों से बरसात के मौसम में यह रास्ता बेहद खराब हो जाता है। शिक्षकों को अपने वाहन स्कूल से काफी पहले खड़े करने पड़ते हैं। इसके बाद कीचड़ भरे रास्ते से होकर किसी तरह विद्यालय पहुंचना पड़ता है। छात्राओं के लिए भी यह रास्ता परेशानी और जोखिम का कारण बना हुआ है।स्थानीय लोगों के मुताबिक यह विद्यालय राप्ती नदी के किनारे बसे और बाढ़ प्रभावित कई गांवों की बच्चियों के लिए महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान है। करीब एक दर्जन गांवों से छात्राएं यहां पढ़ने आती हैं। ऐसे में विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते की बदहाली शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है।छात्राओं का कहना है कि कई बेटियां रास्ते की परेशानी के कारण स्कूल जाना तक छोड़ने को मजबूर हो रही हैं। उनका कहना है—“जान है तो जहान है।प्रशासन से छात्राओं ने की अपील छात्राओं ने जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग से इस समस्या का संज्ञान लेने और विद्यालय तक सड़क बनवाने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो महज 800 मीटर रास्ते की समस्या का समाधान किया जा सकता है।वहीं, स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों से भी सवाल उठ रहे हैं कि जब शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता ही बदहाल है तो विकास के दावों की जमीनी हकीकत क्या है?अब देखना होगा कि छात्राओं की इस आवाज पर प्रशासन और जनप्रतिनिधि कब तक संज्ञान लेते हैं और विद्यालय तक पहुंचने वाले इस 800 मीटर रास्ते को कब तक बेहतर बनाया जाता है।






























