
हरैया सतघरवा में सदर तहसील क्षेत्र के गांवों में खतौनी में अंश संसोधन (जमीन के रिकॉर्ड में हिस्सेदारी बदलना) न होने से किसान परेशान होकर भटक रहे हैं। राजस्वकर्मी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों को धान बेचने, बीज-खाद खरीदने और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने में दिक्कत आ रही है। शिवपुरा बाजार के किसान हरीराम ने बताया कि उनके पिता ने पैतृक 15 बीघा जमीन में से पहले ही 14 बिस्वा जमीन बेच दी थी। लेकिन, हल्का लेखपाल ने अंश संसोधन करते समय उनके हिस्से की जमीन को सह-खातेदारों में बांट दिया है। इस वजह से उनका किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बन पा रहा है। यह समस्या सिर्फ हरीराम की नहीं है। सिंहपुर गांव की प्रदेशिन, मीरा देवी और जयमाला भी अंश संसोधन के लिए पिछले तीन महीने से थाना समाधान दिवस से लेकर तहसील तक के चक्कर लगा रही हैं। उनका कहना है कि खतौनी में हिस्सा कम होने के कारण सरकारी धान खरीद केंद्र पर उनकी धान की बिक्री नहीं हो पा रही है। सत्यापन में खतौनी का अंश कम दिख रहा है। किसानों का आरोप है कि राजस्वकर्मी अंश संसोधन ठीक से नहीं कर रहे हैं। वहीं, जिन किसानों ने अपनी पूरी जमीन बेच दी है, राजस्वकर्मी उन्हें भी खतौनी में हिस्सेदारी दे रहे हैं। ललिया गांव के किसान देवनारायण ने बताया कि कल्लू नाम के खातेदार ने अपनी पूरी जमीन बेच दी है। इसी तरह, लक्ष्मनपुर धर्मपुर में निसार अहमद ने अपनी जमीन मीरा देवी को पांच साल पहले बेच दी थी। इसके बावजूद, राजस्वकर्मी मृतक खातेदारों के नाम पर भी जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किए हुए हैं। इस मामले पर उप जिलाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही किसानों की समस्याओं को दूर कर अंश संसोधन की गलतियों को ठीक कराया जाएगा।






























