
तुलसीपुर के कई स्कूलों में गुरुवार को जन्माष्टमी से पहले ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के कार्यक्रम हुए। स्कूलों को भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकियों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया था। इस दौरान स्कूल परिसर में “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष गूंजते रहे। नन्हे-मुन्ने बच्चे राधा-कृष्ण का रूप धारण कर कार्यक्रम में पहुंचे, जिससे स्कूलों का माहौल पूरी तरह कृष्णमय हो गया। नगर के सरस्वती शिशु मंदिर में जन्माष्टमी पर एक खास कार्यक्रम हुआ। इसमें 36 से ज्यादा बच्चे भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रूप में पहुंचे। बच्चों को कृष्ण-राधा के रूप में सजा देखकर स्कूल के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने उनकी पूजा और आरती की। इस दौरान बच्चों में काफी उत्साह दिखा। स्कूल परिसर में श्रीकृष्ण के भजन और जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी बाल लीलाओं के बारे में बताया। उन्होंने श्रीकृष्ण की माखन चोरी, कालिया नाग मर्दन और गोवर्धन पर्वत उठाने जैसी कहानियों के जरिए उनके जीवन से मिलने वाली सीख समझाई। स्कूल के प्रधानाचार्य शेखर ने भगवान श्रीकृष्ण के अलग-अलग रूपों और उनके जीवन दर्शन पर बात की। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें सच्चाई, धर्म, कर्तव्य, हिम्मत और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बच्चों को देशप्रेम, देशभक्ति और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए भी प्रेरित किया। इसी तरह नानकी देवी बाल विद्या मंदिर, महात्मा गोपाल दास और बलदेव एकेडमी समेत शहर के दूसरे स्कूलों में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के कार्यक्रम हुए। इन स्कूलों में बच्चों के लिए श्रीकृष्ण प्रतियोगिता, रूप सज्जा प्रतियोगिता और झांकी के कार्यक्रम रखे गए। बच्चों ने उत्साह के साथ भगवान श्रीकृष्ण और राधा का रूप धारण कर अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रमों के दौरान बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती की और भक्ति गीत गाए। स्कूलों में हुए इन कार्यक्रमों का मकसद बच्चों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन आदर्शों से परिचित कराना था।
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