कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा से राज्य के राजनीतिक गलियारों में व्यापक हलचल मच गई है। इसे प्रदेश की विपक्षी राजनीति में एक नए समीकरण के रूप में देखा जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस आंतरिक सांगठनिक संकट का सामना कर रही है।
तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी समर्थित गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे द्वारा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भेंट के उपरांत 6 अक्टूबर को प्रस्तावित चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया गया। इस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का आधिकारिक एलान कर दिया।
निर्वाचन आयोग के निर्णय के बाद बदला राजनीतिक परिदृश्य
इससे पूर्व, निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी आंतरिक विवाद के दृष्टिगत पार्टी के नाम एवं पारंपरिक 'जोड़ा घास फूल' चुनाव चिह्न के उपयोग पर अस्थायी रोक (फ्रीज) लगा दी थी। आयोग ने उपचुनाव हेतु दोनों पक्षों को पृथक नाम एवं चुनाव चिह्न आवंटित किए थे।
समर्थन की घोषणा करते हुए ममता बनर्जी ने कांग्रेस को 'स्वाभाविक सहयोगी' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश के व्यापक हित एवं 'इंडिया' गठबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लिया गया है।
समर्थन के उपरांत कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी
ममता बनर्जी द्वारा समर्थन दिए जाने के कुछ ही घंटों पश्चात कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को वर्ष 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से संबंधित एक पुराने मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संबंधों का इतिहास
ममता बनर्जी ने 1990 के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। यद्यपि दोनों दलों के मध्य तीखी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है, परंतु 2001 और 2009 के चुनावों में दोनों ने मिलकर चुनाव लड़ा। वर्ष 2011 में इस गठबंधन ने राज्य में वाममोर्चे के 34 वर्षों के शासन का अंत किया था। हालांकि, बाद के वर्षों में मतभेदों के चलते यह साझेदारी समाप्त हो गई थी।
कांग्रेस के भीतर उभरे भिन्न दृष्टिकोण
ममता बनर्जी के इस कदम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि समर्थन के समय पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपने प्रत्याशी के मैदान से हटने के पश्चात ही उन्होंने यह निर्णय लिया है।
दूसरी ओर, बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि भाजपा विरोधी एवं धर्मनिरपेक्ष मतों को एकजुट करने वाले किसी भी समर्थन का स्वागत किया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व ने प्रत्याशी की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस राजनीतिक घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि यह दो संकटग्रस्त दलों का प्रयास मात्र है और इससे चुनावी परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नंदीग्राम का यह घटनाक्रम तात्कालिक रूप से दोनों दलों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, किंतु दीर्घकालिक स्तर पर इसके प्रभावों को देखना अभी शेष है।













































