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सड़क हादसों पर डीजीपी सख्त, वैज्ञानिक जांच से तलाशे जाएंगे दुर्घटनाओं के मूल कारण

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लखनऊ। सड़क हादसों को रोकने के लिए अब सिर्फ दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसके पीछे की असली वजह तलाशने पर जोर दिया जाएगा। डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस अधिकारियों को सड़क दुर्घटनाओं के मूल कारणों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि हर हादसे के पीछे कोई न कोई वजह होती है और यदि उस कारण की पहचान कर उसे दूर किया जाए तो दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

डीजीपी ने कहा ये

पुलिस मुख्यालय में जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक (जेडएफडी) अभियान के तीसरे और चौथे चरण के लिए गठित क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों की कार्यशाला हुई। इसमें डीजीपी ने कहा कि सड़क दुर्घटना की रोकथाम और उसकी विवेचना सामान्य पुलिसिंग से अलग विशेषज्ञता का काम है। ऐसे में टीमों को इसके लिए जरूरी तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को हादसे के बाद कार्रवाई करने के साथ ही उन वजहों की पहचान करनी होगी, जिनके चलते किसी स्थान पर बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं। डीजीपी ने टीमों को सड़क सुरक्षा, दुर्घटना विश्लेषण, प्रभावी प्रवर्तन और प्राथमिक उपचार के साथ सीपीआर का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया।

जेडएफडी अभियान की शुरुआत इस साल एक जनवरी से सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं वाले 20 जिलों में की गई थी। इसके बाद दूसरे चरण में 59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थलों को चिन्हित कर 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों का गठन किया गया।

आई है कमी

अभियान के असर की बात करें तो जनवरी से अगस्त के बीच जेडएफडी के तहत आने वाले स्थानों पर सड़क हादसों में 6.97 प्रतिशत की कमी आई। इसी अवधि में हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या 8.03 प्रतिशत और घायलों की संख्या 6.11 प्रतिशत कम हुई। बेहतर काम करने वाली कानपुर के विधनू, बाराबंकी और सुल्तानपुर के कोतवाली नगर थाने की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को डीजीपी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।