BREAKING
खबरें लोड हो रही हैं...
Home देश आरक्षण खत्म करने की बहस के बीच आठवले का बयान, बोले- भेदभाव...

आरक्षण खत्म करने की बहस के बीच आठवले का बयान, बोले- भेदभाव मिटे तो जरूरत नहीं

0
3
News Desk

रायपुर: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले अपने विभागीय प्रवास के तहत छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। अपने दौरे के दौरान वे रायपुर और बिलासपुर में आयोजित विभिन्न जन-संवाद कार्यक्रमों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की समीक्षा बैठकों में भाग लेंगे। राज्य में आगमन के उपरांत उन्होंने देश में जारी आरक्षण विवाद पर अपनी बात रखी और कहा कि सामाजिक समानता स्थापित होने तक यह व्यवस्था अपरिहार्य है।

'जब तक जातिवाद रहेगा, लागू रहेगा आरक्षण': मंत्री का रुख

राज्यमंत्री रामदास आठवले ने सामाजिक परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान सामाजिक गैर-बराबरी को दूर करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि समाज से जातिवादी व्यवस्था का पूर्ण उन्मूलन हो जाए, तो वे स्वयं आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने का समर्थन करेंगे। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त की कि संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत अस्पृश्यता खत्म होने के बावजूद आज भी शोषित व वंचित वर्गों पर अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं, इसलिए आरक्षण का विरोध किया जाना तर्कसंगत नहीं है।

विपक्ष पर साधा निशाना, केंद्र सरकार के विकास कार्यों को सराहा

विपक्षी दलों की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का कार्य अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह गया है और वह देश को प्रगति के पथ पर ले जाने में असमर्थ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का चहुंमुखी विकास हो रहा है और केंद्र सरकार दलितों व पिछड़ों को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ था 'आरक्षण हटाओ' प्रदर्शन

हाल ही में राजधानी नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर 'आरक्षण हटाओ' आंदोलन के बैनर तले विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे लोगों ने भाग लिया और जातिगत आरक्षण प्रणाली के खिलाफ नारेबाजी की। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिया था। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस विशाल जमावड़े के लिए पूर्व में कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगे: आर्थिक आधार और मेरिट को मिले प्राथमिकता

डिजिटल प्लेटफॉर्म से शुरू हुआ यह अभियान देखते ही देखते बड़े जन-प्रदर्शन में बदल गया। आंदोलन में शामिल लोगों की मुख्य मांगें निम्नलिखित थीं:

  • वर्तमान जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए।

  • चयन प्रक्रियाओं में शैक्षणिक योग्यता (मेरिट) और आर्थिक स्थिति को प्राथमिक आधार बनाया जाए।

  • आरक्षण का लाभ केवल एक ही वर्ग या पीढ़ी तक सीमित न रहकर इसका न्यायसंगत पुनर्वितरण हो।

  • व्यवस्था में आवश्यक संरचनात्मक सुधार (रिफॉर्म) लाए जाएं तथा प्रस्तावित यूजीसी प्रावधानों में संशोधन किया जाए।