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दिग्विजयनाथ कॉलेज में विश्वकर्मा जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया:चौकबाजार में शिक्षक बीके विमल ने बताया, वे ब्रह्मांड के मुख्य वास्तुकार और पहले इंजीनियर हैं

दिग्विजयनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज चौक बाजार में विश्वकर्मा जयंती से एक दिन पहले भगवान विश्वकर्मा का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत छात्राओं के मधुर गीत से हुई। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर के सामने दीप जलाए गए और फूल चढ़ाए गए। इस मौके पर शिक्षक बिनोद कुमार विमल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा जयंती सनातन धर्म में निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक खास पर्व है। विश्वकर्मा पूजा हिंदू पंचांग की ‘कन्या संक्रांति’ पर आती है। यह भारत और नेपाल में बड़े उत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह आमतौर पर हर साल 17 सितंबर को होती है। यह उत्सव मुख्य रूप से विश्वकर्मा के पांच पुत्रों मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ की संतानों द्वारा मनाया जाता है। इसे कारखानों और औद्योगिक इलाकों में खास तौर पर मनाते हैं। विश्वकर्मा को विश्व का निर्माता और देवताओं का वास्तुकार माना गया है। प्रधानाचार्य डॉक्टर हरिन्द्र यादव ने भी छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का रचनाकार माना जाता है। इस दिन सभी शिल्पी, कारीगर, इंजीनियर और मजदूर अपनी कला और मेहनत का सम्मान करते हैं। इस मौके पर औजारों और मशीनों की पूजा की जाती है। कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर उपयोग होने वाले औजारों, वाहनों और मशीनों की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि इनमें भगवान विश्वकर्मा का वास है। इस पूजा से काम में सफलता, सुरक्षा और व्यापार में बढ़ोतरी की प्रार्थना की जाती है। इस अवसर पर काम करने वालों और कारीगरों का सम्मान कर उन्हें प्रसाद और उपहार बांटे जाते हैं। इस मौके पर विद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं, कर्मचारी और ज्यादातर छात्र-छात्राएं मौजूद थे।