
बस्ती में सांप के डसने के बाद 19 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बस्ती मेडिकल कॉलेज की कैली इकाई में जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था। मेडिकल स्टाफ ने पर्ची देकर दवा बाहर से लाने को कहा। काफी तलाश के बाद भी दवा नहीं मिली तो युवक को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। गोरखपुर ले जाते समय नौसढ़ के पास एंबुलेंस में ही युवक ने दम तोड़ दिया। घटना 31 अगस्त की रात की है। दुबौलिया थाना क्षेत्र के सिसौनी गांव निवासी 19 वर्षीय सचिन और उनके बड़े भाई अमरजीत को सांप ने काट लिया था। पड़ोसी रूस्तम के मुताबिक, उन्हें रात करीब एक बजे घटना की जानकारी हुई। इसके बाद वह बाइक से दोनों भाइयों को लेकर करीब आधे घंटे के भीतर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल में दोनों का करीब डेढ़ घंटे तक उपचार चला। इसके बाद डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें मेडिकल कॉलेज कैली ले जाने की सलाह दी। परिजन दोनों भाइयों को लेकर कैली पहुंचे। रूस्तम का कहना है कि मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद उपचार के दौरान उन्हें एक पर्ची दी गई, जिस पर नियोस्टिग्माइन इंजेक्शन लिखा था। नौसढ़ पहुंचते ही एंबुलेंस में दम तोड़ा रूस्तम के अनुसार, मेडिकल स्टाफ ने कहा कि इंजेक्शन मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं है और इसे बाहर से लेकर आना होगा। साथ ही उनसे कहा गया कि अगर दवा जल्द नहीं लाई गई और मरीज को कुछ हुआ तो अस्पताल की जिम्मेदारी नहीं होगी। परिजनों ने रात करीब 3:29 बजे के आसपास शहर के कई मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन तलाशा, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिली। दवा नहीं मिलने के बाद युवक को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। रूस्तम का कहना है कि एंबुलेंस के लिए भी परिजनों को करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ भी एंबुलेंस की व्यवस्था को लेकर परेशान रहे। बाद में दोनों भाइयों को एंबुलेंस से गोरखपुर के लिए रवाना किया गया। परिजनों के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब छह बजे गोरखपुर जाते समय नौसढ़ के पास सचिन की एंबुलेंस में ही हालत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। युवक की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। प्रिंसिपल बोले- दवा खत्म हो गई थी, मौत का कारण नहीं मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जिस दवा को बाहर से लाने के लिए लिखा गया था, वह अस्पताल में खत्म हो गई थी। इसी वजह से उसे बाहर से लाने के लिए कहा गया था। हालांकि उन्होंने युवक की मौत को दवा उपलब्ध न होने से जोड़ने से इनकार किया। प्रिंसिपल के मुताबिक, परिजन मरीज को लाने में भी देरी कर चुके थे और दवा की कमी के कारण युवक की मौत नहीं हुई। मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रशासन के पक्ष के बीच इलाज, दवा की उपलब्धता और रेफर किए जाने की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं































