
महराजगंज में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक यशवंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई और स्थानांतरण का मामला अब शासन तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता उमेश प्रसाद ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा समेत कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शासन की ओर से आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य मांगे जाने के बाद शिकायतकर्ता ने शपथपत्र के साथ विभागीय पत्रों, जांच रिपोर्ट और लोकायुक्त से हुए पत्राचार समेत कई दस्तावेज उपलब्ध कराने का दावा किया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की खुली सतर्कता जांच कराने की मांग की है। उमेश प्रसाद के अनुसार, उन्होंने वरिष्ठ लिपिक यशवंत सिंह के खिलाफ महानिदेशक स्कूल शिक्षा के समक्ष शिकायत की थी। इसके बाद सहायक शिक्षा निदेशक, बेसिक शिक्षा, गोरखपुर की ओर से 17 फरवरी 2026 को जांच आख्या अपर राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश को भेजी गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने जांच रिपोर्ट प्राप्त कर महानिदेशक स्कूल शिक्षा से दोबारा शिकायत की। इसके बाद सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से 4 सितंबर 2025 और 30 अक्टूबर 2025 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महराजगंज को यशवंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन पत्रों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। लोकायुक्त ने भी मांगी थी जांच रिपोर्ट उमेश प्रसाद ने बताया कि कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने लोकायुक्त, उत्तर प्रदेश के समक्ष परिवाद दाखिल किया। इसके बाद लोकायुक्त के सचिव ने 22 जनवरी 2026 को महानिदेशक स्कूल शिक्षा से मामले की विस्तृत जांच आख्या मांगी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, राज्य परियोजना निदेशक, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद और तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जांच रिपोर्ट तैयार कर लोकायुक्त कार्यालय को भेजी गई। उनका आरोप है कि जांच रिपोर्ट में यशवंत सिंह को बचाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने 20 जुलाई 2026 को इस रिपोर्ट के संबंध में अपना प्रतिउत्तर लोकायुक्त के समक्ष उपलब्ध कराने का दावा किया है। स्थानांतरण की पत्रावली पर भी उठाए सवाल शपथपत्र में यशवंत सिंह के स्थानांतरण का मामला भी उठाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, शिकायतों को देखते हुए महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने उन्हें दूसरे जिले में स्थानांतरित करने के लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिए थे। उमेश प्रसाद का दावा है कि पहले यशवंत सिंह के मथुरा स्थानांतरण का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें देवरिया स्थानांतरित करने का अनुमोदन किया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि तत्कालीन बेसिक शिक्षा निदेशक ने उन्हें फोन पर इसकी जानकारी दी थी और उस बातचीत की रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। अपर मुख्य सचिव पर लगाए पद के दुरुपयोग के आरोप उमेश प्रसाद ने अपने शपथपत्र में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा पर भी पद और अधिकारों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इसी वजह से यशवंत सिंह के स्थानांतरण का आदेश जारी नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि यशवंत सिंह के महराजगंज में रहने से कथित रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई प्रभावित हो रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शासन से कार्रवाई और जांच की मांग शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में कथित रूप से संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ खुली सतर्कता जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि राजकोषीय हित को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। गौरतलब है कि 5 अगस्त 2026 को नियुक्ति अनुभाग-5 की ओर से उमेश प्रसाद को भेजे गए पत्र में कहा गया था कि शिकायत के साथ शपथपत्र दिया गया है, लेकिन आरोपों की पुष्टि के लिए समुचित साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए। शासन ने 9 मई 1997 के कार्मिक अनुभाग-1 के शासनादेश का हवाला देते हुए आरोपों के समर्थन में साक्ष्य मांगे थे और स्पष्ट किया था कि साक्ष्य के अभाव में शिकायत पर कार्रवाई संभव नहीं होगी। अब शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने जवाब में संबंधित विभागीय पत्र, जांच रिपोर्ट, लोकायुक्त से हुआ पत्राचार और फोन रिकॉर्डिंग समेत विभिन्न दस्तावेज शासन को उपलब्ध करा दिए हैं। मामले में आरोपों की वास्तविकता जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी।































