अबू धाबी। क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया के सबसे अमीर और शक्तिशाली शख्स चांगपेंग झाओ (जिन्हें 'सीजेड' के नाम से भी जाना जाता है) आजकल अपनी शाही और बेखौफ जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जेल भेजे जाने और चार महीने की कैद काटने के बाद अब वह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में विलासितापूर्ण जीवन जी रहे हैं।
शानदार जीवनशैली और रसूख
अबू धाबी के सादियात द्वीप पर 9 बेडरूम वाले आलीशान विला में रहने वाले झाओ के पास चार बॉडीगार्ड्स, निजी शेफ और 'दा मून' नाम की एक लग्जरी यॉट मौजूद है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रेसिडेंशियल पार्डन (माफी) मिलने के बाद वह किसी राष्ट्राध्यक्ष की तरह प्राइवेट जेट से एशिया के विभिन्न देशों में यात्राएं कर रहे हैं और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति के साथ स्कीइंग करते नजर आते हैं।
ट्रंप परिवार के साथ गहरी कारोबारी सांठगांठ
झाओ के इस बढ़ते राजनीतिक और व्यावसायिक रसूख के पीछे दुनिया के प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के साथ उनकी गहरी पार्टनरशिप है। उनकी कंपनी बाइनेंस ने ट्रंप और उनके बेटों के क्रिप्टो स्टार्टअप 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के साथ कारोबारी रिश्ता जोड़ा है। अमीरात के सरकारी फंड एमजीएक्स द्वारा बाइनेंस में दो अरब डॉलर का निवेश करने के लिए ट्रंप परिवार के स्टेबलकॉइन यूएसडी1 का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद अमेरिका द्वारा यूएई को एआई चिप्स के निर्यात की मंजूरी दी गई और अक्तूबर में झाओ को माफी मिल गई। अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने इस पूरी घटना को इतिहास का "सबसे निर्लज्ज भ्रष्टाचार" करार दिया है।
लोकतंत्र को लेकर विवादित बयान
हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान, जब झाओ की गाड़ी अबू धाबी के राष्ट्रपति भवन 'कसर अल वतन' के सामने से गुजरी, तो उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सदियों से पवित्र माना गया है, लेकिन हकीकत में यह व्यवस्थाएं सुस्त और अक्षम होती हैं। उनके अनुसार, यदि किसी देश में कोई परोपकारी तानाशाह हो, तो शासन प्रणाली बेहद कुशल हो जाती है और फालतू बहस में समय बर्बाद नहीं होता।
जेल की सजा और भारी जुर्माना
गौरतलब है कि साल 2024 में झाओ को अमेरिका में मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानूनों के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया था, जिसके चलते उन्होंने कैलिफोर्निया की लोम्पोक जेल में चार महीने बिताए। हालांकि उनकी कंपनी पर 4.3 अरब डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया था, फिर भी उनकी अरबों डॉलर की कुल संपत्ति (लगभग 114 अरब डॉलर यानी 10.83 लाख करोड़ रुपये) सुरक्षित बनी रही।










































