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रूदलपुर प्राथमिक विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी भरा:सरयू नदी खतरे के निशान से 36 सेमी ऊपर, गांवों में मुश्किल बढ़ी

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बस्ती के सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का असर अब ग्रामीण इलाकों के साथ सरकारी संस्थानों तक पहुंचने लगा है। रूदलपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय के परिसर में बाढ़ का पानी भर गया है। स्कूल परिसर में पानी पहुंचने से यहां का कामकाज प्रभावित हुआ है और बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर सरयू नदी खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण नदी और तटबंध के बीच बसे गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कई निचले इलाकों में पानी घुसने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीण लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। रूदलपुर प्राथमिक विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी भरने के बाद विद्यालय की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। परिसर में पानी जमा होने से विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए आवागमन मुश्किल हो गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही सरयू सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में नदी खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी के बढ़ते जलस्तर से किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को डर है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल सकता है। नदी और तटबंध के बीच बसे गांव बाढ़ की चपेट में आने के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील हैं। इन क्षेत्रों में पानी बढ़ने के साथ खेतों और आबादी वाले हिस्सों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों को अपने घरों, पशुओं और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है। सरयू का जलस्तर लगातार ऊपर जाने से आसपास के कई निचले इलाकों में पानी प्रवेश करने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों की निगाह नदी के जलस्तर पर है। प्रशासन और स्थानीय लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते राहत और बचाव की व्यवस्था की जा सके। बाढ़ का पानी स्कूल परिसर तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है और हालात पर नजर रखना जरूरी है। सबसे बड़ी चिंता छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को सुरक्षित रखने की है।