बस्ती जिले के बनकटी विकासखंड की खरबानिया ग्राम पंचायत का राजस्व गांव जिगनिया है। इस गांव में जाने के लिए ग्रामीणों को संत कबीर नगर जिले की सीमा में घुसना पड़ता है। यह गांव संत कबीर नगर के बॉर्डर पर ही है। गांव में आखिरी बार चकबंदी साल 1962 में हुई थी। उसके बाद से अब तक कोई चकबंदी नहीं हुई है। जिगनिया गांव में कोई सरकारी स्कूल, पार्क या चारागाह के लिए सरकारी जमीन नहीं है। गांव के बच्चे संत कबीर नगर बॉर्डर पर बने एक स्कूल में पढ़ने जाते हैं। यह स्कूल करीब 1 किलोमीटर दूर है। पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए लगभग 6 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। जिगनिया गांव का मुख्य मार्ग अकेला नाम के राजस्व गांव से जुड़ता है। इन दोनों गांवों को जोड़ने वाली सड़क के बीच लगभग 100 मीटर जोत की जमीन है। इस वजह से दोनों गांवों के बीच कोई संपर्क मार्ग नहीं है। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए, ग्राम प्रधान रामकिशन के प्रयासों से चकबंदी अधिकारी ईश्वर चंद्र शर्मा ने चकबंदी करने का फैसला लिया है। यह फैसला गांव के सभी लोगों की सहमति से हुआ है। चकबंदी अधिकारी ने कानून गो रामदयाल मौर्य की मौजूदगी में लेखपाल को तहसील बुलाया। लेखपाल अपने रजिस्टर और कागजात के साथ मौजूद थे। ग्रामीणों ने प्रस्ताव दिया है कि जिगनिया और जिगनिया उर्फ देवमी गांव (राजस्व संख्या 384/404) की चकबंदी की जाए। उनकी मांग है कि चकबंदी से रास्ते, स्कूल, सड़क, चारागाह की जमीन और सेक्टर रोड बनाए जाएं, ताकि गांव का विकास हो सके। जिगनिया गांव के लगभग 50 ग्रामीणों ने चकबंदी की इच्छा जताई है। इनमें श्यामप्ति, सीताराम, रंजीत, राम प्रताप, राम पारस, चौथी शर्मा, अजय कुमार, कौशल्या, अशोक, अंजू, रामदीन, सुमन, दिनेश, रामचरित, सुनील कुमार, राम सुभाष, राम मोहित और सुभाष शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी होने से उनके गांव का विकास होगा। चकबंदी अधिकारी ने प्रधान और कानून गो के साथ जिगनिया गांव जाकर ग्रामीणों के साथ बैठक भी की है।
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