
घाघरा नदी में लगातार पानी छोड़े जाने से सुजौली और जंगल गुलरिहा के आसपास के गांवों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने से इलाके के कई मजरे बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जंगल गुलरिहा के कई मजरे तो पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार, 5 सितंबर की शाम करीब 7 बजे से घाघरा नदी में लगातार 1.83 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बताया गया है कि नदी में जितना पानी आ रहा है, लगभग उतना ही आगे छोड़ा जा रहा है। लगातार पानी के दबाव के कारण निचले इलाकों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। क्षेत्रीय ग्रामीणों परशुराम, सत्या निषाद, वकील, राजेंद्र, राहुल और देवेंद्र ने बताया कि बाढ़ के कारण पीने के साफ पानी की भी काफी दिक्कत आ रही है। ग्रामीणों को गांव के बाहर ऊंचे स्थानों पर जाकर पानी लाना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन लगातार राहत कार्य कर रहा है। प्रभावित ग्रामीणों को राहत सामग्री और लंच पैकेट बांटे जा रहे हैं। प्रशासनिक टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत के हिसाब से मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और बेवजह बाढ़ के पानी में न जाएं। बच्चों और बुजुर्गों को खासकर पानी वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे आसपास के लोगों को भी बाढ़ के हालात की जानकारी देते रहें। फिलहाल घाघरा नदी के बढ़ते पानी ने सुजौली और जंगल गुलरिहा इलाके में चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों की नजर अब नदी के जलस्तर और प्रशासन की राहत व्यवस्था पर टिकी हुई है।




































